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Seat Ka Samikaran: कभी कांग्रेस का गढ़ रही बथनाहा पर 15 वर्षों से भाजपा का कब्जा, ऐसा है यहां का चुनावी इतिहास

Thu, 18 Sep 2025 07:35 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज रीगा विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में भाजपा के अनिल कुमार को जीत मिली थी।

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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। भाजपा, जदयू से लेकर राजद और कांग्रेस तक, सभी ने कमर कस ली है। कोई भी जनता तक पहुंचने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम कद्दावर नेता सरकार के विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। वहीं, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी भी लगातार जनता से संपर्क कर रहे हैं। एनडीए और महागठबंधन में सीट के बंटवारे को लेकर भी लगातार गहमागहमी देखने को मिल रही है। इस सियासी हलचल के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बथनाहा विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से पिछले चुनाव में भाजपा के मोती लाल प्रसाद को जीत मिली थी। 

 

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पहले जानते है बथनाहा सीट के बारे में

बिहार के 38 जिलों में से एक सीतामढ़ी जिला भी है। जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें रीगा, बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, सीतामढ़ी, रुन्नीसैदपुर, बेलसंड विधानसभा सीटें शामिल हैं। बथनाहा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सीतामढ़ी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। इस लोकसभा क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती है, इसमें बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, सीतामढ़ी और रुन्नीसैदपुर शामिल हैं। बथनाहा सीट पर सबसे पहले 1967 में चुनाव हुए थे। 2010 में इस सी को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया था। 

1967 में सबसे पहले हुए चुनाव 
सबसे पहले चुनाव इस सीट पर 1967 में हुए थे। तब यहां सबसे पहले संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को जीत मिली थी। संसोपा के एमपी शर्मा ने कांग्रेस के जी. देवी को 14199 वोट से हरा दिया था। एमपी शर्मा को 32505 और कांग्रेस के जी. देवी को 18306 वोट मिले थे। 

कांग्रेस ने किया सीट पर कब्जा

  • 1969 में इस सीट पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1985 तक लगातार कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के राम बहादुर सिंह ने तत्कालीन विधायक और संसोपा के मोहन लाल शर्मा को 5912 वोट से हरा दिया था। 
  • 1972 में कांग्रेस के विभाजित होने के बाद यहां कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन के पतुरी सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार मोहन लाल शर्मा को 11051 वोट से हरा दिया था। 
  • 1977 में कांग्रेस को तीसरी जीत मिली, लेकिन कांग्रेस का उम्मीदवार पिछले दो चुनावों के जैसे ही यहां भी बदल चुका था। कांग्रेस के सूर्यदेव राय ने जनता पार्टी के ललितेश्वर प्रसाद सिंह को 3560 वोट से हरा दिया था। 
  • 1979 में एक बार फिर कांग्रेस में विभाजन हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कांग्रेस (यू) कहलाई और इंदिरा गांधी की कांग्रेस कांग्रेस (आई) कहलाई। 1980 में बिहार में हुए चुनाव में कांग्रेस (यू) के सूर्यदेव राय ने कांग्रेस(आई)के कैप्टन रामनिवास को 4728 वोट से हरा दिया था। 
  • 1985 में एक बार फिर से कांग्रेस को सीट पर जीत मिली। हालांकि यह कांग्रेस की आखिरी जीत थी। इसके बाद सीट पर कभी कांग्रेस को जीत नहीं मिली। कांग्रेस के रामनिवास ने कांग्रेस (सोशलिस्ट) के सूर्यदेव राय को 17580 वोट से हरा दिया था। 


जनता दल को मिली जीत
1977 और 1980 दो बार कांग्रेस के टिकट पर जीते सूर्यदेव राय ने एक बार फिर से सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार वे पार्टी बदल कर जनता दल में शामिल हो चुके थे। 1990 के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय राजेंद्र सिंह 42432 वोट से हरा दिया था। 1995 में एक बार फिर से सूर्यदेव राय ने सीट पर जीत दर्ज की। जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज करते हुए उन्होंने समता पार्टी के इंदल सिंह नवीन को 22833 वोट से हरा दिया था। 2000 में सूर्यदेव राय तीसरी बार यहां से चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई थी। लेकिन इस बार सूर्यदेव ने पार्टी बदलकर राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था।  के सूर्यदेव राय ने समता पार्टी के राज किशोर सिंह कुशवाहा को 14603 वोट से हरा दिया था। 

लोजपा ने दो बार जीता चुनाव 
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। इन दोनों ही चुनावों में लोजपा की नगीना देवी को जीत मिली थी। पहले चुनाव फरवरी 2005 में हुए थे, इसमें लोजपा की नगीना देवी ने तत्कालीन विधायक और राजद के प्रत्याशी सूर्यदेव राय को 4419 वोट से हरा दिया था। 2005 में दूसरी बार चुनाव अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव में दोबारा लोजपा की नगीना देवी को ही जीत मिली थी। लोजपा की नगीना देवी ने राजद के सूर्यदेव राय को 9438 वोट से हरा दिया था। 


 

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2010 से भाजपा को मिली जीत 
2010 में पहली बार सीट पर भाजपा को जीत मिली थी। 2010 में भाजपा के दिनकर राम को जीत मिली। उन्होंने लोजपा की ललिता देवी को हरा दिया था। 2010 मे इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया था। 2015 में चुनाव के नतीजे 2010 के समान ही रहे, लेकिन लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच हो गई थी। भाजपा के दिनकर राम ने कांग्रेस के सुरेंद्र राम को 20166 वोट से हरा दिया था। 


2020 में फिर भाजपा को जीत मिली, लेकिन इस बार भाजपा का उम्मीदवार बदल चुका थी। 2020 में तत्कालीन विधायक दिनकर राम का निधन हो गया था। यहां से भाजपा के अनिल कुमार ने कांग्रेस के संजय राम को 46,818 वोट से हरा दिया था। 

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