बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बाबूबरही विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में जदयू की मीना कुमारी को जीत मिली थी।
बिहार विधानसभा चुनावों में तारीखों के इंतजार से ज्यादा इंतजार सीट बंटवारे को लेकर हो रहा है। सियासी खींचतान के बीच अमर उजाला की बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बाबूबरही विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते है बाबूबरही सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक मधुबनी जिला भी है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर (एससी), झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा विधानसभा सीटें शामिल हैं। बाबूबरही विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र झंझारपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। झंझारपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, इसमें खजौली,बाबूबरही, राजनगर (एससी), झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा सीट शामिल है। बाबूबरही सीट पर सबसे पहली बार चुनाव 1977 में हुए थे।
1977: जनता पार्टी को मिली जीत
1977 में सीट पर पहली बार चुना हुए थे। तब यहां जनता पार्टी के देवनारायण यादव को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के महेंद्र नारायण झा को 6852 वोट से हरा दिया था। देवनारायण यादव को 30613 और महेंद्र नारायण झा को 23761 वोट मिले थे।
1980 में कांग्रेस को मिली जीत
1980 के चुनाव में यहां से कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस (आई) के महेंद्र नारायण झा ने जनता पार्टी (जेपी) के देव नारायण यादव को 15350 वोट से हरा दिया था। महेंद्र नारायण झा को 32349 और देवनारायण यादव को 16999 वोट मिले थे। पिछले बार के चुनावी नतीजे इस बार पूरी तरह पलट गए थे।
1985 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस के गुना नंद झा ने जनता पार्टी के देवनारायण यादव को 1678 वोट से हरा दिया था।
जनता दल को मिली जीत
1990 में इस सीट पर जनता दल के टिकट पर देव नारायण यादव को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के महेंद्र नारायण झा को 19013 वोट से हरा दिया था।
1995 में एक बार फिर जनता दल के देव नारायण यादव को जीत मिली थी। उन्होंने समता पार्टी के ब्रम्हदेव नारायण सिंह को 29218 वोट से हरा दिया था।
2000 में एक बार फिर देवनारायण यादव को जीत मिली थी। राजद के देवनारायण यादव ने समता पार्टी के ब्रह्मदेव नारायण सिंह को 1281 वोट से हरा दिया था।
उपचुनाव में राजद को जीत
2003 में देवनारायण यादव की मौत के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराने पड़े थे। तब सीट पर राजद के उमा कांत यादव को जीत मिली थी। उन्होंने समता पार्टी के ब्रह्म देव नारायण सिंह को 3,647 वोट से हरा दिया था।
2005 में फिर उमाकांत यादव को जीत
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहली बार चुनाव फरवरी में हुए थे। इस चुनाव में राजद के उमाकांत यादव ने जदयू के कपिल देव कामत को 6894 वोट से हरा दिया था।
दूसरी बार चुनाव अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव में जदयू के कपिल देब कामत ने मौजूदा विधायक और राजद के उमा कांत यादव को 208 वोट से हरा दिया था।
2010 में फिर उमा कांत यादव को मिली जीत
इस चुनाव में एक बार एक बार फिर उमा कांत यादव को जीत मिली थी। राजद के उमा कांत यादव ने जदयू के कपिलदेव कामत को 4913 वोट से हरा दिया था।
2015 में जदयू को मिली जीत
इस चुनाव में एक बार फिर जदयू के कपिल देव कामत को जीत मिली थी। उन्होंने लोजपा के बिनोद कुमार सिंह को 20267 वोट से हरा दिया था। उमा कांत यादव सपा के टिकट पर इस बार तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे। 2020 में कोराना के कारण कपिल देव कामत का निधन हो गया था।
2020 में एक बार फिर जदयू के जीत मिली थी। जदयू की मीना कुमारी ने राजद के उमाकांत यादव को 11488 वोट से हरा दिया था।