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सीट का समीकरण: अर्थशास्त्र के प्रोफेसर से सीएम की कुर्सी तक, कैसे झंझारपुर ने बदली जगन्नाथ मिश्र की किस्मत

Sat, 19 Apr 2025 10:17 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

‘सीट का समीकरण’ सीरीज की पांचवीं कड़ी में आज हम आपको झंझारपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र हैं। 
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जगन्नाथ मिश्र और उनके बेटे नीतीश मिश्र। - फोटो : Agency
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विस्तार
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बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार की राजनीति, उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज के जरिए बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की पांचवीं कड़ी में आज हम आपको झंझारपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र हैं। उनके बेटे नीतीश मिश्र झंझारपुर के मौजूदा विधायक और नीतीश कुमार सरकार में मंत्री हैं। 
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सबसे पहले जानते हैं झंझारपुर सीट के बारे में 
बिहार के 38 जिलों में से एक मधुबनी जिला भी है। यह जिला 5 अनुमंडल और 21 ब्लाक में विभाजित है। मधुबनी जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर, झंझारपुर, फुलपरास और लौकहा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात झंझारपुर विधानसभा सीट की करेंगे। इस सीट पर 1952 में पहली बार चुनाव हुए थे। 

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1969 में कांग्रेस इस सीट पर हारी
ये पहला चुनाव था बज कांग्रेस को झंझारपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इस बार जीत हासिल हुई संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के रामफल चौधरी को। राम फल चौधरी ने भारतीय जन संघ के राजेंद्र झा को 8665 वोट से हरा दिया था। 

1972 से जगन्नाथ मिश्र पहली बार यहां से जीते
1972 में एक बार फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर अपना परचम लहराया। इस बार जगन्नाथ मिश्र ने यहां से जीत दर्ज की। मजेदार बात यह है कि जगन्नाथ मिश्र एक समय मुजफ्फरपुर में स्थित बिहार यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे थे। हालांकि, नियति का चक्र ऐसा घूमा कि उनके बड़े भाई और तब कांग्रेस के कद्दावर नेता ललित नारायण मिश्र ने उन्हें राजनीति में उतार दिया। एलएन मिश्र कितने बड़े राजनीतिज्ञ थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने छोटे भाई जगन्नाथ को मुख्यमंत्री बनाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका थी। खुद जगन्नाथ मिश्र भी बचपन से ही राजनीति में रुचि रखते थे, सो उन्होंने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ी और उतर गए राजनीति में। 

जगन्नाथ मिश्र के तीन बार बिहार के सीएम के तौर पर राज्य की कमान संभालने की शुरुआत यहीं से हुई। हालांकि, मिश्र एक बार भी मुख्यमंत्री के तौर पर पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 1972 से 1995 तक जगन्नाथ मिश्र झंझारपुर के विधायक रहे। 

झंझारपुर को अपना बनाने में सफल रहे जगन्नाथ मिश्र
झंझारपुर से जगन्नाथ मिश्र ने कुल पांच बार चुनाव जीता था। 1972 में जगन्नाथ मिश्रा ने मौजूदा विधायक सोशलिस्ट पार्टी के राम फल चौधरी को 36,542 वोट से हरा दिया था। इसके बाद 1977, 1980, 1985, 1990 में भी इस सीट से जगन्नाथ मिश्र ने ही जीत दर्ज की। 
 

1995 में जनता दल को मिली जीत
1994 में कांग्रेस के टिकट पर जगन्नाथ मिश्र को राज्यसभा भेज दिया गया। इसके बाद उन्होंने इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा। 1995 में जनता दल को सीट पर जीत मिली। जनता दल के रामअवतार चौधरी ने कांग्रेस के देव चंद्र झा को 23,029 वोट से हरा दिया। 

2000 में राजद को मिली जीत 
2000 में हुए चुनाव में राजद के जगदीश नारायण चौधरी ने भारतीय जन कांग्रेस (राष्ट्रीय) और पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्र को 10,049 से हरा दिया था। जगन्नाथ मिश्रा के बाद इस सीट से कांग्रेस को कभी भी झंझारपुर सीट से जीत नहीं मिल पाई। हालांकि उनके बेटे नीतीश मिश्र दो बार जनता दल यूनाइटेड और फिर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर यहां सेज जीत दर्ज कर रहे हैं। 2005 में पहली बार नीतीश मिश्र को इस सीट पर जीत मिली। 

2005 से नीतीश मिश्र का गढ़ बनी सीट
2005 में बिहार में एक ही साल के अंदर दो बार चुनाव कराने पड़े थे। 2005 फरवरी में हुए चुनाव में जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नीतीश मिश्र ने जीत दर्ज की। उन्होंने राजद के जगदीश नारायण चौधरी को 16,039 वोट से हरा दिया। 2005 अक्टूबर में हुए चुनाव में फिर से नीतीश मिश्र ने जीत दर्ज की। जदयू के नीतीश मिश्र ने राजद के राम अवतार चौधरी को 16,660 वोट से हराया। 2010 में जदयू के नीतीश मिश्र ने जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने राजद के जगत नारायण सिंह को 20,681 वोट से हरा दिया। 


 
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  • 2015 में नीतीश मिश्र को हार का सामना करना पड़ा। इस बार राजद के गुलाब यादव ने भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ रहे नीतीश मिश्र को मात्र 834 वोट से हरा दिया था।
  • 2020 में भाजपा के टिकट पर नीतीश मिश्र को जीत मिली। भाजपा के नीतीश मिश्र ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राम नारायण यादव को 41,788 के बड़े अतंर से हराया।
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