पश्चिमी चंपारण जिले का हिस्सा है बेतिया सीट
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। यह जिला तीन अनुमंडल और 18 ब्लाक में विभाजित है। पश्चिमी चंपारण जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें वाल्मीकि नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया और सिकटा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात बेतिया विधानसभा सीट की करेंगे। बेतिया पश्चिमी चंपारण का एक महत्वपूर्ण भाग है। यहां पश्चिमी चंपारण का मुख्यालय भी मौजूद है। पूरे देश के साथ ही 1951-52 में ही यहां पर पहली बार चुनाव हुए थे।
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1952 से 1962 तक कांग्रेस को मिली जीत
1951-52 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे। इस चुनाव में बेतिया सीट से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के प्रजापति मिश्रा ने अखिल भारतीय भारतीय जनसंघ के प्रफुल्लो कुमार सान्याल को 14,549 वोट से हरा दिया। 1952 में इस सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें कांग्रेस की केतकी देवी ने जीत दर्ज की थी।
1957 के चुनाव में बेतिया सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। उस चुनाव में इस सीट से दो विधायक चुने गए। तब भी जीतने वाले दोनों उम्मीदवार कांग्रेस से थे। पहले विजेता कांग्रेस के जय नारायण प्रसाद और दूसरे कांग्रेस के ही जगन्नाथ पीडी. स्वतंत्र थे।
1962 में फिर से इस सीट को सामान्य कर दिया गया। इसके साथ ही कुछ सीटों से दो विधायक चुनने वाला नियम भी समाप्त हो गया। 1962 में बेतिया सीट से कांग्रेस के जय नारायण प्रसाद को जीत मिली। प्रसाद ने इस चुनाव में जनसंघ के मदन लाल सिंघानिया को 7,069 वोट से हराया।
1990 में भाजपा की पहली जीत
1990 में बेतिया सीट पर भाजपा को पहली बार जीत मिली। इस चुनाव में भाजपा के मदन प्रसाद जायसवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार नागेश्वर शाही को 6,739 वोट से हरा दिया। 1995 में बेतिया सीट पर जनता दल ने जीत दर्ज की। जनता दल के बीरबल यादव ने भाजपा के तत्कालीन विधायक डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल को महज 505 वोट से हराया।