बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए तीन चरणों में हुए मतदान के बाद जब एग्जिट पोल्स हुए तो लगभग सभी एजेंसियों और मीडिया संस्थानों ने राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन की सरकार बनने की भविष्यवाणी कर दी। हालांकि एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता बिहार चुनाव को लेकर पहले भी संदेह के घेरे में रही है।
2015 विधानसभा चुनाव में बिहार के लोगों ने देखा है कि कैसे एग्जिट पोल्स में भाजपा को सरकार बनाते हुए दिखाया गया था और परिणाम जारी होते-होते भाजपा की किस्मत में विपक्ष में बैठना तय हो गया। जीत का सेहरा बंधा, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की अगुवाई वाले महागठबंधन के सिर।
मंगलवार सुबह आठ बजे जब पोस्टल बैलेट के साथ वोटों की गिनती शुरू हुई, तो भी शुरुआती कुछ घंटों तक महागठबंधन आगे बढ़ता दिख रहा था। फिर दिन चढ़ते और ढलते के साथ एनडीए और महागठबंधन में कड़ी टक्कर होती दिखी।
कभी एनडीए आगे बढ़ती दिखी तो कभी फिर से महागठबंधन वापसी करता दिखा। लेकिन दोनों ही स्थितियों में एक बात जो कॉमन दिख रही थी, वह थी भाजपा के खाते में सीटों की बढ़ती संख्या। तस्वीर साफ होती दिख रही थी कि राज्य में सरकार किसी की भी बने, भाजपा बड़ी छलांग मारने वाली है। और हुआ भी ऐसा ही।
थोड़ा पीछे चलते हैं। तीसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद एग्जिट पोल्स जारी हुए और फिर पोल ऑफ पोल्स यानी सभी एग्जिट पोल्स के निचोड़ में भी राजद का नारा 'तेज रफ्तार, तेजस्वी सरकार' बुलंद होता दिखा। चुनाव के नतीजों से एक दिन पहले तेजस्वी यादव को उनके जन्मदिन पर मुख्यमंत्री बनने तक की एडवांस बधाई दी जाने लगी। तेजस्वी ने भी जीत के प्रति आश्वस्त होते हुए राज्य भर के कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की।
इस बीच महागठबंधन के नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं तो देखने को मिल रही थी, जदयू महासचिव केसी त्यागी जैसे वरिष्ठ नेता के बयानों में भी मायूसी दिखी, लेकिन भाजपा शीर्ष की ओर से एक खामोशी दिख रही थी। लेकिन यह खामोशी किसी सन्नाटे नहीं, बल्कि गंभीरता की ओर इशारा करती दिखी। भाजपा एक ऐसे खिलाड़ी की भूमिका में रही, जिसने अपने सारे दांव फेंक दिए हों और जीत की उम्मीद के साथ बस परिणाम घोषित होने का इंतजार कर रही हो।
मंगलवार को जब वोटों की गिनती शुरू हुई तो शुरुआती कुछ घंटे महागठबंधन समर्थकों के पक्ष में दिखा, लेकिन फिर दिनभर कांटे की टक्कर चलती रही। कभी एनडीए आगे तो कभी महागठबंधन। महज घंटे भर में लगातार और कई बार रुझान बदलता रहा। गौर करने वाली बात यह रही कि एनडीए में भाजपा और महागठबंधन में राजद अग्रणी भूमिका में रहा, जबकि एनडीए में जदयू और महागठबंधन में कांग्रेस पिछड़ती रही।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनाव में एनडीए के हार की भी संभावना बनने पर इसका ठीकरा जदयू के नीतीश कुमार पर फूटना तय था। बिहार में सरकार कोई भी बनाए, लेकिन एनडीए टीम के एक खिलाड़ी के तौर पर भाजपा का प्रदर्शन असाधारण है, जो उसे जदयू पर हावी होने के लिए 'कारण' देने को पर्याप्त है।