कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आखिरकार भाजपा के विजयरथ को रोकने में सफलता पा ली। बतौर अध्यक्ष राहुल को ये कामयाबी उनके कार्यकाल के पहले साल के आखिर दिन मिली। राहुल ने पिछले साल 11 दिसंबर को ही पार्टी की कमान संभाली थी। राहुल के कार्यकाल में पार्टी ने कुछ उपचुनाव जरूर जीते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने भले ही भाजपा को हराने की काट निकाल ली हो लेकिन अभी उन्हें अपनी सरकार वाले राज्यों को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है। इस चुनाव में भी एक राज्य मिजोरम खोना पड़ा है। कर्नाटक चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस का भाजपा से राजनीतिक जीत हासिल करने का श्रेय भी राहुल गांधी को जाता है क्योंकि स्थानीय स्तर पर बात बनती नहीं दिख रही थी।
राहुल ने अपनी पारी की शुरूआत वक्त है बदलाव के नारे के साथ की। जिस कांग्रेस को 2014 के बाद से लगातार हार का मुंह देखना पड़ रहा हो उसमें बदलाव का दौर शुरू हुआ है। जिस राहुल गांधी पर राजनीतिक गंभीरता न होने के आरोप भाजपा और पार्टी के भी कुछ नेता लगाते थे। उसने मध्यप्रदेश में 25 रैली चार रोड शो, राजस्थान और छत्तीसगढ में 19-19 रैलियां करके चुनाव की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई। एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपाशासित राज्यों में सत्ता विरोधी लहर को बचाने के लिए रैलियां कर डैमेज कंट्रोल में जुटे थे वहीं राहुल बदले राजनीतिक माहौल को लोगों के बीच कांग्रेस में फिर से विश्वास जिताने में जुटे थे।