राजनीति के दिग्गज लालू यादव और उनका परिवार मुसीबत में है, अवैध संपत्ति के मामले में जहां सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियां उन पर शिकंजा कस रही हैं, वहीं राजनीति के रण में भी लालू भंवर में फंसे हैं। उन पर बेटे तेजस्वी को मंत्रीमंडल से इस्तीफा करवाने का दबाव है तो वो विरोधियों के निशाने पर भी हैं।
बिहार की सत्ता में लालू बेशक साझीदार हैं लेकिन गठबंधन के दूसरे सहयोगी नीतीश कुमार से भी उनकी अदावत अब जग जाहिर हो चुकी है। नीतीश पहले राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें झटका दे चुके हैं तो तेजस्वी के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री के तल्ख रुख ने लालू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर राजद के नेता भी दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी किसी दबाव में नहीं झुकेगी और तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे।
ऐसे में इस तनातनी ने महागठबंधन को खतरे में डाल दिया है। बड़ी दिक्कत ये है कि अवैध संपत्ति के मामले में अभी तक बाहरी वार झेल रहे लालू परिवार को अब अपनों के सवालों से भी जूझना पड़ रहा है।
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने राजद से सवाल पूछ लिया है कि लालू यादव बताएं कि उनके पास इतनी संपत्ति कहां से आई। माना जा रहा है कि इस तनातनी के बीच अब गठबंधन और सरकार पर भी संकट खड़ा हो गया है। जानिए इस भंवर के बीच लालू के पास क्या हैं वो मुख्य विकल्प।
ये हैं पांच विकल्प
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तेजस्वी को शहीद की तरह पेश कर सकती है पार्टी
अभी तक की तनातनी के बीच एक बात तो साफ हो चुकी है कि आरोपों से घिरने के बाद भी फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल तेजस्वी यादव से इस्तीफा लेने के मूड़ में नहीं है, लेकिन एक संभावना ये भी बताई जा रही है कि बात अगर सरकार पर बनती है तो फिर तेजस्वी से इस्तीफा लेकर उन्हें शहीद की तरह पेश किया जा सकता है। तेजस्वी का इस्तीफा होने के बाद लालू की पार्टी यह दावा भी कर सकती है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह भी पूरी तरह पाकदर्शी रवैये के पक्ष में है।
सभी मंत्री इस्तीफा देकर बाहर से सरकार को दें समर्थन
एक विकल्प ये भी सामने आ रहा है कि अगर नीतीश कुमार तेजस्वी के इस्तीफे की जिद पकड़ते हैं तो फिर राजद कोटे के सभी मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि पार्टी सरकार से बाहर शायद ही जाएगी क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो भाजपा नीतीश का समर्थन कर सरकार बचा सकती है।
समर्थन वापिस लेकर खुद की जाए सरकार बनाने की पहल
एक चर्चा ये भी चल रही है कि तनातनी बढ़ने के बाद लालू की पार्टी नीतीश कुमार से समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दे, फिर इसके बाद अपने 80, कांग्रेस के 27 और दाएं बाएं से कुछ अन्य विधायकों के सहारे सरकार बनाने का जुगाड़ भी कर ले। क्योंकि सत्ता से जाने के बाद लालू परिवार की मुश्किलें बढ़नी तय हैं ऐसे में पार्टी नहीं चाहेगी 17 साल बाद आया मौका हाथ से जाने दिया जाए।
नीतीश से खुद बातचीत कर हल निकाल सकते हैं लालू
नीतीश से खुद बातचीत कर हल निकाल सकते हैं लालू
अभी तक के विवाद में एक बात ही सामने आ रही है कि बेनामी संपत्ति मामले में नाम आने के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच बातचीत पूरी तरह बंद है। इसका ही असर है कि लालू और उनके परिवार पर छापे पड़ने के बाद भी नीतीश कुमार ने अभी तक मुंह नहीं खोला है। ऐसे में एक संभावना ये भी है कि इस संकट का हल निकालने के लिए लालू यादव खुद पहल कर नीतीश कुमार से बातचीत कर सकते हैं, जिसमें कोई राह निकालने की संभावना ज्यादा है। माना जाता है नीतीश आज भी लालू का काफी सम्मान करते हैं।
बात बिगड़ी तो नीतीश पर ही इस्तीफा देने का दबाव बना सकते हैं लालू
जानकारों की मानें तो लालू यादव इतनी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं हैं। अगर मामला हाथ से निकलना दिखता है तो वो खुद नीतीश कुमार से भी इस्तीफा देने का दबाव बना सकते हैं। लालू इसके लिए नीतीश को नैतिकता की दुहाई देकर उनसे इस्तीफा देने के लिए भी कह सकते हैं। इसके बाद जोड़तोड़ कर सरकार बनाना भी उनके लिए मुश्किल काम नहीं लगता।