गुजरात के सूरत शहर में कपड़ा उद्योग से जुड़े व्यापारियों का जीएसटी के खिलाफ प्रदर्शन अभी भी जारी है। आठ जुलाई को सूरत के व्यापारी बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले। व्यापारियों, आम लोगों से
पटी सड़कों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं । कारोबारियों का आरोप है कि नई जीएसटी व्यवस्था से उनका उद्योग धंधामंदा होगा। ऑल इंडिया टेक्सटाइल ट्रेडर्स फेडरेशन के अध्यक्ष और
सूरत जीएसटी टेक्सटाइल संघर्ष समिति के संयोजक ताराचंद कसाट के मुताबिक जहां उन्हें पहले केवल सूत पर टैक्स देना पड़ता था। जीएसटी के तहत व्यापारियों को कपड़ा बनाने के हर स्टेज पर
पांच प्रतिशत टैक्स देना होगा।
कसाट कहते हैं, "जहां सूरत की 75 हज़ार दुकानें बंद हैं, पूरे भारत में करीब डेढ़ करोड़ दुकानें बंद करके हम जीएसटी का विरोध कर रहे हैं।" कसाट के मुताबिक, "कपड़ा 27 विभिन्न चरणों से गुजर कर
तैयार होता है। जीएसटी के तहत हमें हर चरण पर टैक्स देना होगा। टैक्स रेकॉर्ड की देखरेख में निवेश लगेगा। उद्योग से जुड़े ज्यादातर लोग गरीब और अनपढ़ हैं। उनके लिए ऐसा करना संभव नहीं हैं।"
कसाट की मांग है कि सरकार विभिन्न चरणों की बजाए मात्र पहले चरण (सूत कातने) पर टैक्स लगाए या फिर जीएसटी लागू करने में देरी करे और जब तक ऐसा नहीं होता वो अपना विरोध जारी रखेंगे।
कन्फडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री प्रमुख जे तुलसीदरन कहते हैं, "टैक्स का जमा खाता बरकरार रखने में वक्त लगता है और प्रक्रिया बेहद पेचीदा है।"