अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों को तरजीह देते हुए अब रोजगार के लिए दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले प्रोफेशनल्स पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी प्रशासन ने मंगलवार को एच-1बी और एल 1 जैसे वर्क वीजा की शर्तों को सख्त बनाने वाला बिल अमेरिकी संसद में पेश किया। इस कदम से भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों और पेशेवरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा तैयार यह आदेश न सिर्फ एच-1बी और एल-1 वीजा पर रोक लगाता है बल्कि इंस्पेक्टर राज में भी वृद्धि करता है। इस तरह के वर्क वीजा पर पति या पत्नी को रोजगार देने का अधिकार भी खत्म करता है। जिसे हाल ही में ओबामा प्रशासन ने शुरू किया था। बिल में एच-1 बी वीजा के लिए न्यूनतम वेतन की सीमा दोगुनी से ज्यादा बढ़ाते हुए एक लाख 30 हजार डॉलर रखने का प्रस्ताव है। अभी इसकी सीमा 60 हजार डॉलर है।
इस बिल के अमल में आने से कंपनियों के लिए अमेरिकी की जगह भारत या दूसरे देशों के प्रोफेशनल्स को रखना मुश्किल हो जाएगा। इस आदेश का मसौदा सोमवार को ही लीक होकर कई समाचार वेबसाइटों पर प्रकाशित हो गया था। अमेरिकी संसद में यह बिल पेश होते ही आईटी कंपनियों के शेयर तेजी से गिरे।
अमेरिकी संसद में पेश किया गया नया प्रस्ताव
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने अपनी दैनिक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को बताया, ‘मैं समझता हूं कि एच-1बी वीजा और अन्य वीजा बड़े पैमाने पर आव्रजन सुधार प्रयासों का ही हिस्सा हैं जिस बारे में राष्ट्रपति एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिये और कांग्रेस के साथ काम करते हुए लगातार बात करते रहेंगे। आप आव्रजन पर कई सारी कार्रवाई देख चुके हैं और मैं समझता हूं कि चाहे इस तरह का वीजा हो या दांपत्य वीजा या अन्य किसी तरह का वीजा, इन सभी नीतियों में समग्र संशोधन की जरूरत है।’
लीक हुए मसौदा आदेश के अनुसार ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण वर्क वीजा की अवधि बढ़ाने की नीति को पलट दिया है। इसके तहत विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद भी लंबे समय तक अमेरिका में रहने की इजाजत थी।
एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करने के 90 दिनों के अंदर गृह मंत्रालय सभी कानून की समीक्षा करेगा कि विदेशी नागरिकों को अमेरिका में काम करने की इजाजत दी जाए या नहीं और यह भी तय करेगा कि किस-किस कानून से आव्रजन नियमों का उल्लंघन होता है या कौन सा कानून अमेरिका के हित में नहीं है।
भारत ने एच-1बी वीजा के नफा-नुकसान से अमेरिका को अवगत कराया
अमेरिका में एच-1बी वीजा और अन्य वर्क वीजा में संशोधन संबंधी नए आदेश पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दस्तखत करने की तैयारी को देखते हुए भारत ने कहा है कि इसने अपने नफा-नुकसान के बारे में अमेरिका को अवगत करा दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, ‘एच-1बी वीजा को लेकर भारत के हितों और चिंताओं से अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।’ हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि मसौदा तैयार होने के बाद यह मुद्दा उठाया गया है या इससे पहले।
अमेरिका में एच-1 बी वीजा के लिए आवेदन करने वालों में लगभग दो तिहाई भारतीय होते हैं जो टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी भारतीय आईटी कंपनियों के लिए काम करते हैं या एक्सेंचर, आईबीएम तथा गूगल जैसी अमेरिकी कंपनियों के लिए स्थानीय ऑपरेशंस में काम करते हैं।