पुणे में एक निजी कंपनी की बस में आग लगने और चार कर्मचारियों की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि आग दुर्घटनावश नहीं लगी थी। बल्कि बस चालक ने लगाई थी। क्योंकि उसका कुछ कर्मचारियों के साथ विवाद था और वह वेतन में कटौती से परेशान था।
पुणे में एक निजी कंपनी की बस में आग लगने और चार कर्मचारियों की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि आग दुर्घटनावश नहीं लगी थी। बल्कि बस चालक ने लगाई थी। क्योंकि उसका कुछ कर्मचारियों के साथ विवाद था और वह वेतन में कटौती से परेशान था।
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पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस विशाल गायकवाड़ ने बताया कि जांच में पता चला है कि आग एक दुर्घटना नहीं थी। आरोपी चालक जनार्दन हंबरडेकर का कुछ कर्मचारियों के साथ विवाद था और वह बदला लेना चाहता था। वेतन कटौती के कारण चालक भी नाखुश था।
डीसीपी ने कहा कि जिन कर्मचारियों से उसकी दुश्मनी थी, वे चार मृतकों में शामिल नहीं थे। डीसीपी ने कहा कि आरोपी ने ज्वलनशील रसायन बेंजीन खरीदा था। उसने बस में टोनर पोंछने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कपड़ा भी रखा था। जब बस हिंजवाड़ी के पास पहुंची, तो उसने माचिस जलाई और कपड़े में आग लगा दी।
पुलिस ने बताया कि इसके बाद आरोपी चालक चलती बस से कूद गया। बस करीब सौ मीटर चलने के बाद रुक गई। हंबरदेकर भी बस से बाहर निकलने से पहले ही जल चुका था। ड्राइवर का अस्पताल में इलाज चल रहा है और बाद में उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
बुधवार को बस में आग लगने से चार कर्मचारियों शंकर शिंदे (63), राजन चव्हाण (42), गुरुदास लोकरे (45) और सुभाष भोसले (44) की मौत हो गई थी। वे बस में पीछे बैठे थे और समय पर आपातकालीन निकास द्वार नहीं खोल पाए। इसके अलावा छह यात्री झुलस गए थे। डीसीपी ने कहा कि आगे की जांच जारी है।