आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने बताया कि 632 जिलों में से 238 जिलों में बरसात का पैटर्न बहुत तेजी से बदल चुका है। बारिश के 112 साल के आंकड़ों के अध्ययन पर नजर डालें तो इसका सबसे ज्यादा असर राजस्थान और गुजरात में सामने आया है। 1901 से 2013 के बीच राजस्थान में 9 फीसदी तो गुजरात में 26.2 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
बारिश की बात जो चौंकाती है वह यह कि बारिश ने तो तेजी से रास्ता बदला लेकिन खेती किसानी में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। और जिस तरह से ट्रेंड बदल रहा है और बारिश का ट्रेंड स्थायी है तो फसल चक्र और शहरी ढांचे में जल्दी बदलाव किए जाने चाहिए।
यही नहीं शोध बताते हैं कि 1979 से 2015 के बीच एक दिन में भारी बारिश के मामले दो गुना बढ़ गए हैं। एक घंटे से भी कम समय में भारी बारिश से शहरों में बाढ़ की स्थिति बन जाती है। पिछले कुछ दशकों में यह ट्रेंड देखने में आया है कि शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे में बहुत तेज बारिश होने के मौके बढ़ गए हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक इस साल उत्तर पश्चिम में औसत का 100 प्रतिशत, मध्यभारत में 99 प्रतिशत, दक्षिण में 95 प्रतिशत और उत्तर पूर्व में 93 प्रतिशत बारिश होने की संभावना जताई है। और अगर पूर्वानुमान के अनुसार देश में 97 प्रतिशत बारिश हुई तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब मानसून सामान्य रहेगा। जबकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल मानसून में ड्राय-डे बढ़ेगे।