असम सरकार के मंत्रिमंडल की बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई। इसमें तमाम अहम फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि असम में रेस्टोरेंट, होटल और सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस (बीफ) नहीं बिकेगा। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में गोमांस उपभोग पर मौजूदा कानून में संशोधन कर नए प्रावधान शामिल करने का निर्णय लिया गया।
असम सरकार के मंत्रिमंडल की बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई। इसमें तमाम अहम फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि असम में रेस्टोरेंट, होटल और सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस (बीफ) नहीं बिकेगा। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में गोमांस उपभोग पर मौजूदा कानून में संशोधन कर नए प्रावधान शामिल करने का निर्णय लिया गया।
आज असम मंत्रिमंडल ने राज्य के होटलों, रेस्टोरेंट्स और सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।#AssamBeefBanpic.twitter.com/Nhda2uQ3Gt
उन्होंने कहा कि पहले हमारा फैसला मंदिरों के पास गोमांस खाने पर रोक लगाने का था लेकिन अब हमने इसे पूरे राज्य में विस्तारित कर दिया है। राज्य में बीफ परोसने और खाने का मौजूदा कानून मजबूत है, लेकिन अभी इसमें होटल, रेस्टोरेंट, धार्मिक और सार्वजनिक समारोहों में इसे खाने पर प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है। अब हमने सार्वजनिक स्थानों पर बीफ खाने और परोसने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिए कानून को और कठोर बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि असम कैबिनेट का विस्तार 7 दिसंबर को दोपहर 12 बजे होगा।
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कुछ दिन पहले ही असम के कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि उसने नगांव जिले के सामगुरी विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए बीफ पार्टी का आयोजन किया था। इस पर पलटवार करते हुए कुछ दिन पहले सीएम सरमा ने कहा था कि यदि असम कांग्रेस के अध्यक्ष उन्हें पत्र लिखकर बीफ पर प्रतिबंध की मांग करें, तो वह इसे लागू करने के लिए तैयार हैं।
असम के मंत्री ने किया ट्वीट
वहीं असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि मैं असम कांग्रेस को चुनौती देता हूं कि वह गोमांस प्रतिबंध का स्वागत करे या फिर पाकिस्तान जाकर बस जाए।
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वहीं ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक और पार्टी महासचिव डॉ हाफिज रफीकुल इस्लाम ने कहा कि कैबिनेट को यह तय नहीं करना चाहिए कि लोग क्या खाएंगे या क्या पहनेंगे? भाजपा गोवा में गोमांस पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती, वे पूर्वोत्तर राज्यों में गोमांस पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते, फिर असम में क्यों? हम इस निर्णय पर ज्यादा ध्यान नहीं देते।
असम के दरांग-उदलगुरी से भाजपा सांसद दिलीप सैकिया ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है। जनता भी यही चाहती थी। इस फैसले को सांप्रदायिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान के तौर पर देखा जाना चाहिए। निजी तौर पर गोमांस खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
क्या कहता है असम का कानून
असम मवेशी संरक्षण अधिनियम 2021 के अनुसार राज्य में बीफ का सेवन गैरकानूनी नहीं है। लेकिन कानून में उन क्षेत्रों में मवेशी वध और बीफ की बिक्री पर प्रतिबंध है जहां हिंदू, जैन और सिख बहुसंख्यक हैं या किसी मंदिर या मठ के पांच किलोमीटर के दायरे में हैं।
इन राज्यों में अभी रोक नहीं
भारत में करीब 80 फीसदी हिंदुओं की आबादी है। हिंदू गाय को पूजते हैं। यही वजह है कि देश में बीफ पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग लंबे वक्त से हो रही है। कुछ राज्यों में ऐसी व्यवस्था है, लेकिन कई राज्य ऐसे हैं, जहां बीफ बेचने की कानूनन छूट है। इन राज्यों में केरल, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप शामिल हैं। जिन राज्यों में बीफ पर पूरी तरह प्रतिबंध है, इसमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ शामिल हैं।