फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हुड्डा के एक इशारे पर 'बागी' हो चली थी इन विधायकों की टोली, अब सभी को मिला टिकट

Tue, 15 Oct 2019 09:32 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
विज्ञापन
भूपेंद्र हुड्डा (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन
हरियाणा विधानसभा चुनाव में खासतौर पर कांग्रेसी खेमें में, अगर किसी को बहुत कुछ मिला है तो वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैं। 90 सीटों का लेखा जोखा देखें तो 60 से अधिक सीटों पर हुड्डा का दबदबा रहा है। उनके सभी समर्थकों को टिकट मिल गया है। दो महीने पहले हुड्डा के एक इशारे पर बागी बनने के लिए चल पड़े सभी 13 विधायकों को उन्होंने दोबारा टिकट दिला दिया है। इनमें से अधिकांश विधायक रोहतक, सोनीपत और झज्जर जिले से ताल्लुक रखते हैं। पहले इन जिलों की ज्यादातर सीटें रोहतक में ही आती थीं। बाद में सोनीपत और झज्जर दो अलग जिले बनने के बाद विधानसभा सीटों का भी बंटवारा हो गया। 
विज्ञापन


हुड्डा के खास माने वाले जाने वाले वो सभी मौजूदा विधायक इस बार कड़े मुकाबले में फंसे हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के हिस्से 15 सीटें आई थीं। इनमें से रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी को छोड़ दें तो बाकी सारे विधायक हुड्डा खेमें में आ गए। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, अशोक तंवर जिन्होंने अब पार्टी छोड़ दी है, वह पांच साल तक अकेले ही चलते रहे। तंवर के राजनीतिक कार्यक्रमों में किरण चौधरी ही दिखाई पड़ती थीं। रणदीप सुरजेवाला यह कह कर उनसे अलग रहे कि मैं तो राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहा हूं। 

हरियाणा जनहित कांग्रेस की टिकट पर जीते कुलदीप बिश्नोई और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई कांग्रेस में शामिल हो गए, लेकिन अशोक तंवर के साथ उनकी पटरी भी नहीं बैठ सकी। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से रणदीप सुरजेवाला (कैथल), कुलदीप शर्मा (गन्नोर), जयतीर्थ दहिया (राई), जगबीर सिंह मलिक (गोहाना), श्रीकृष्ण हुड्डा (बड़ोदा), जयवीर सिंह बाल्मीकि (खरखौदा), किरण चौधरी (तोशाम), आनंद दांगी (महम), भूपेंद्र हुड्डा (किलोई), शकुंतला खटक (कलानौर), रघुबीर कादियान (बेरी), उदयभान (होडल), करण दलाल (पलवल), ललित नागर (तिगांव) और गीता भुक्कल (झज्जर) जीत कर आए थे। 
विज्ञापन


हुड्डा बागी होने लगे तो 13 मौजूदा विधायक भी आ गए साथ
प्रदेश कांग्रेस में लोकसभा चुनाव से पहले व बाद में अशोक तंवर और हुड्डा के बीच तनातनी चलती रही। अगर कांग्रेस पार्टी के किसी कार्यक्रम में तंवर आते तो हुड्डा गैर हाजिर रहते। इसी तरह भूपेंद्र हुड्डा पार्टी का कोई आयोजन करते तो वहां तंवर नहीं पहुंचते थे। अगस्त में हुड्डा ने कांग्रेस हाईकमान को कड़ा संदेश देने के लिए बागी होने की राह पकड़ ली। उन्होंने रोहतक में रैली कर पार्टी को यह संदेश दे दिया कि वे और उनके समर्थक कांग्रेस पार्टी से किनारा कर सकते हैं। रोहतक रैली में हुड्डा के मंच पर 13 मौजूदा विधायक उपस्थित रहे। उन सभी ने भी हुड्डा के साथ चलने का फैसला कर लिया। 

इतना ही नहीं प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधायक रहे 60 नेताओं ने भी हुड्डा को अपना समर्थन दे दिया। कांग्रेस हाईकमान को झुकना पड़ा और विधानसभा चुनाव में हुड्डा को वाक ओवर दे दिया गया। नतीजा, हुड्डा ने सभी 13 मौजूदा विधायकों को टिकट दिला दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने करीब पचास अपने दूसरे समर्थकों को भी पार्टी का टिकट दिलाया। 

हुड्डा और उनके सभी सिपहसालार कड़े मुकाबले में फंसे हैं इस बार                
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने समर्थकों को टिकट दिलाकर यह तो साबित कर दिया कि कांग्रेस हाईकमान आज भी उनके साथ है। अब उनके सामने बड़ी चुनौती अपने समर्थकों को जीत दिलाने की है। तकरीबन भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सभी समर्थक कड़े मुकाबले में फंसे हैं। हुड्डा से दूरी बनाकर चलने वाले नेता कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी और रणदीप सुरजेवाला भी भाजपा के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। 

भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सभी समर्थकों पटकनी देने के लिए भाजपा ने खास रणनीति बनाई है। भाजपा के अधिकांश स्टार प्रचाकर इन्हीं नेताओं के विधानसभा क्षेत्रों में रैली कर रहे हैं। अब वोटिंग में महज पांच दिन शेष हैं, इसलिए भाजपा ने पहली पंक्ति में शामिल स्टार प्रचारकों के अलावा दूसरी पंक्ति के नेताओं को भी चुनाव प्रचार में उतार दिया है। अमित शाह ने अभी तक जहां पर रैलियां की हैं, वहां ज्यादातर कांग्रेस के मौजूदा विधायक ही मैदान में हैं। 

पिता-पुत्र, दोनों ने प्रचार में झौंकी पूरी ताकत
हरियाणा में अपने समर्थक कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पिता पुत्र यानी भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पूरी ताकत झौंक दी है। इन दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। चूंकि कांग्रेस हाईकमान ने टिकटों के बंटवारे में हुड्डा को वाक ओवर दे दिया था तो अब हुड्डा पर भी अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को जीत दिलाने का दबाव है। अगर वे ऐसा करने में कामयाब हो जाते हैं तो कांग्रेस हाईकमान के सामने उनके विरोधी कुछ नहीं बोल सकेंगे। 

यदि वे अपने समर्थकों की जीत सुनिश्चित नहीं करा पाते तो कांग्रेस हाईकमान उनके बारे में दोबारा से सोच सकती है। यही वजह है कि पिता पुत्र दिन रात कांग्रेस प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं। रोहतक, सोनीपत और झज्जर में दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने जिम्मेदारी संभाल रखी है। वे रोजाना दर्जनों इलाकों में जनसभाएं कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में रोहतक में तीन, झज्जर में दो व सोनीपत में पांच सीटों पर हुड्डा समर्थित कांग्रेस विधायक चुने गए थे। इस बार फिर से भूपेंद्र सिंह हुड्डा का यह प्रयास है कि कम से कम इन तीन जिलों में उनके ज्यादा से ज्यादा समर्थक जीतकर विधानसभा पहुंचें। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें