चर्चित भीमा कोरेगांव हिंसा (एलगार परिषद) मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने के बाद एनसीपी और शिवसेना के बीच मतभेद बढ़ गया है। सोमवार को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने वाइ.बी.चव्हाण सेंटर में एनसीपी मंत्रियों की बैठक बुलाई। उन्होंने अलग से एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया। इस बैठक के बाद गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि राज्य सरकार भीमा कोरेगांव हिंसा की समानांतर जांच कराएगी। इस संबंध में जल्द ही एसआईटी का गठन किया जाएगा।
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए को सौंपने से शरद पवार काफी नाराज हैं। उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की थी। पवार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा था, लेकिन इसी बीच 24 जनवरी को केंद्र सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी। करीब दो सप्ताह के बाद एनसीपी सुप्रीमो की मांग को अनदेखा कर उद्धव ठाकरे ने भी कह दिया कि मामले की जांच एनआईए को सौंपने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। दूसरे दिन पुणे सत्र न्यायालय ने मामले को मुंबई के विशेष एनआईए कोर्ट के सुपुर्द करने का आदेश दे दिया। इससे पवार की खासी किरकिरी हुई है।
सरकार के फैसले को चुनौती
भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच एनआईए को सौंपने के बाद महाराष्ट्र में किंगमेकर बने शरद पवार की साख को बट्टा लगा है। इसके चलते पवार ने शिवसेना को काउंटर अटैक करने के लिए एनआईए के समानांतर जांच की योजना बनाई है। यह एक तरह से सरकार के फैसले को चुनौती मानी जा रही है। वहीं, एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि एनआईए की धारा 10 के तहत जांच के लिए अलग समिति गठित की जा सकती है।