वरवरा राव को गिरफ्तार करके पुणे लाया गया
पुणे पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता कवि और लेखक वरवरा राव को शनिवार रात को हैदराबाद के गांधीनगर स्थित उनके घर से गिरफ्तार करके पुलिस पुणे ले आई है। उन्हें भीमा कोरेगांव मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। राव को उस समय गिरफ्तार किया गया है जब एक दिन पहले ही उनकी तरफ से हैदराबाद मैजिस्ट्रेट कोर्ट की ट्रांजिट रिमांड और पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को खारिज करने वाली याचिकाएं रद्द कर दी गई थीं। ट्रांजिट रिमांड के जरिए पुलिस उन्हें पुणे की अदालत में पेश कर सकते हैं।
गुरुवार को पुणे अदालत ने उनके और पांच कार्यकर्ताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इन सभी को 6 जून को माओवादियों के साथ संबंध होने के चलते गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा इनके तीन नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारकर सामाजिक असंतोष फैलाना और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को हथियारों के बल पर हटाने की साजिश में शामिल हैं। 28 अगस्त को पुलिस ने राव के साथ चार कार्यकर्ताओं को प्रतिबंधित माओवादी संगठन के साथ कथित संबंध होने के चलते गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने वरवरा राव की नजरबंदी की अवधि शनिवार को समाप्त होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था। बता दे कि गुरुवार को इस मामले में पुणे पुलिस ने पुणे सत्र न्यायालय में पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए थे। जिनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था उनमें एडवोकेट सुरेंद्र गडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, सुधीर ढवाले और रोना विल्सन शामिल हैं।
इससे पहले पुणे सेशंस कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा में आरोपी सुधा भारद्वाज, अरुण फेरेरा और वर्नोन गॉन्जाल्विस को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कोर्ट उनकी जमानत याचिका खारिज खारिज कर चुका है और तीनों को नजरबंद रखा गया है। कोर्ट में पेशी के दौरान अरुण फेरेरा ने बताया था कि हिरासत के दौरान हुई पूछताछ में उन्हें काफी मारा-पीटा गया है। अरुण फरेरा ने कहा था कि 4 नवंबर को पूछताछ के दौरान 8 से 10 बार पुलिस अधिकारियों ने मारा जिसकी वजह से उनकी तबियत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।