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पश्चिम बंगाल में पिछड़ों के सहारे भाजपा

Sat, 26 Mar 2016 12:21 PM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता

सार

  • पार्टी द्वारा जारी सूची में अधिकतर उम्मीदवार पिछड़ी जातियों से
  • डोमकल से चुनाव लड़ेंगे पूर्व आईपीएस नजरुल
  • जंगलमहल पर वर्चस्व की जंग शुरू
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- फोटो : PTI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा पिछड़ों के सहारे मैदान में उतरने वाली है। इसीलिए तो उम्मीदवारों के चयन के मामले में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य दलों के मुकाबले उसने अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी ने अब तक 245 सीटों के लिए जो सूची जारी की है, उसमें  अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े तबके के उम्मीदवारों की भरमार है। कई अनारक्षित सीटों पर भी ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं।
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भाजपा के प्रदेश महासचिव प्रताप बनर्जी का कहना है कि हमने आरक्षित सीटों के अलावा जनरल सीटों पर भी पिछड़े तबके के योग्य युवाओं को मैदान में उतारने का प्रयास किया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बंगाल में भाजपा के इस रवैये से साफ है कि वह ऊंची जाति की पार्टी होने के तमगे को हटाने का प्रयास कर रही है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगभग तमाम पार्टियों में अगड़ी जाति के नेताओं का ही वर्चस्व रहा है। हुगली के औद्योगिक इलाके व डुआर्स-दार्जिलिंग में आबादी मिलीजुली रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि हम अपनी सूची में पिछड़े तबके के अधिक से अधिक लोगों को शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं। यह एक नया प्रयोग है। राज्य में लगभग 27.5 फीसदी वोटर अनुसूचित जाति के हैं और लगभग 42 फीसदी अन्य पिछड़ी जातियों के। किसी भी पार्टी के लिए इनके वोट निर्णायक हैं।
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ऐसे में भाजपा ने राज्य में बाकी दलों से उलटे पांव जमाने की अपनी रणनीति के तहत पिछड़े तबके के लोगों को जगह देकर एक नई परंपरा की शुुरुआत तो कर ही दी है।
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डोमकल से चुनाव लड़ेंगे पूर्व आईपीएस नजरुल

अपनी पार्टीके बैनर तले नजरूल लड़ेंगे चुनाव
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी नजरुल इस्लाम भी अबकी बार चुनाव मैदान में हैं। वह अपनी नई पार्टी मूलनिवासी के बैनर तले मुर्शिदाबाद जिले के डोमकल से चुनाव लड़ेंगे। नजरुल ने हाल में ही अपनी नई पार्टी का गठन किया है। उनका चुनाव चिन्ह सीटी है।

नजरुल इस्लाम ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दूसरे पिछड़े तबके के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए ही उन्होंने मूलनिवासी पार्टी का गठन किया है। कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी रहे इस्लाम बाद में विभिन्न वजहों से उनके खिलाफ हो गए। इसी वजह से उनको पुलिस महानिदेशक के पद पर प्रमोशन नहीं मिला और सहायक महानिदेशक के तौर पर ही रिटायर होना पड़ा। उन्होंने अपनी ताजा पुस्तकों में ममता पर ही कटाक्ष किया है।

यहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और यहां अपना खोया जनाधार पाने का प्रयास कर रही भाजपा में जंगलमहल को लेकर वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है। दोनों तरफ से रैलियों का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पलड़ा फिलहाल इस मामले में भारी नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंगलमहल के खड़गपुर में रविवार को पहली चुनावी रैली को संबोधित करेंगे, लेकिन उससे पहले शुक्रवार से ही इलाके के दौरे पर पहुंची ममता ने बड़े पैमाने पर चुनावी रैलियां शुरू कर दी हैं।

सूत्रों ने बताया कि ममता शनिवार को बीनपुर, गोपीभपुर और नयाग्राम विधानसभा क्षेत्रों में तीन रैलियों को संबोधित करेंगी। इन सीटों पर पहले चरण में चार अप्रैल को मतदान होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 मार्च को खड़गपुर में पहली चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। खड़गपुर सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष मैदान में हैं। उसके अगले दिन ही ममता इलाके में चार और रैलियां करेंगी।
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