उत्तर प्रदेश में मिशन 2017 को परवान चढ़ाने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मई माह के अंत से सूबे का सियासी मैदान संभालेंगे। उन्होंने अपने करीबियों को इस आशय के संकेत अभी से दे दिए हैं। उनके नजदीकी नेताओं के अनुसार शाह मई माह के अंत से लखनऊ में डेरा डाल सकते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने करीबी नेताओं से कहा है कि वे भी मई से यूपी के सियासी मैदान में डटें।
दरअसल शाह के रणनीतिकारों को इस बात का पूरा अहसास है कि यूपी भाजपा के क्षेत्रीय क्षत्रपों को संभालना नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य के बूते की बात नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि असम चुनाव के दौरान प्रदेश के दौरे पर गए शाह ने वहां के प्रभारी महेंद्र सिंह से भी चुनाव खत्म होने के बाद यूपी में मोर्चा संभालने को कहा है। वहीं प्रदेश नेतृत्व से भाव न मिलने से बेसब्र हो रहे रमाकांत यादव और दरोगा सरोज सरीखे दूसरे दलों से आए नेताओं को आश्वस्त किया है कि उनकी अनदेखी नहीं होगी।
प्रदेश अध्यक्ष पद पर केशव मौर्य की नियुक्ति भी शाह के मिशन 2017 के गेम प्लान का हिस्सा है। यही वजह है कि प्रदेश प्रभारी ओम माथुर तक को इस बारे में भनक नहीं लग पाई। तमाम वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर मौर्य पर खेला गया शाह का सियासी दांव सटीक बैठता दिख रहा है। जिस तरह से बसपा प्रमुख मायावती ने मौर्य पर सियासी हमला बोला है, उसे देखकर भाजपा के रणनीतिकार बेहद खुश हैं।
उनकी दलील है कि भले ही भाजपा के कुछ नेताओं ने मौर्य को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया मगर मायावती ने उन पर हमला बोलकर उन्हें राजनीतिक रूप से बड़ा बनाते हुए शाह की रणनीति को आसान बना दिया है।