केरल विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा को पहली बार कमल खिलने की उम्मीद है। दरअसल करीब तीन दर्जन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला, यूडीएफ और एलडीएफ के मुकाबले गठबंधन तैयार करने में मिली सफलता और इस गठजोड़ में अंत समय में राज्य के चर्चित आदिवासी नेता सीके जानू के शामिल होने के कारण इस बार पार्टी की उम्मीद का आधार पिछले चुनावों के मुकाबले ज्यादा मजबूत है।
केरल में हमेशा से मुख्य मुकाबला कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ और एलडीएफ के बीच होता रहा है। स्थानीय कारणों और भाजपा का आधार मजबूत न होने के कारण संघ भी परोक्ष रूप से कभी यूडीएफ तो कभी एलडीएफ के पक्ष में वातावरण बनाता आया है।
मगर लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा को मिले करीब 10.5 फीसदी मत के बाद संघ ने गंभीरता के साथ चुनाव लड़ने का मन बनाया। संघ इस बार भाजपा की चुनावी रणनीति की कमान संभाले हुए है। इस क्रम में उसने खुद से सीधे जुड़े रहे के राजशेखरण को राज्य संगठन की कमान दिलाई थी।