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कोविड-19: भारत बायोटेक ने देश में शुरू किया कोवाक्सिन के तीसरे चरण का ट्रायल

Tue, 17 Nov 2020 08:34 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन टीके का परीक्षण (फाइल फोटो) - फोटो : iStock
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भारत बायोटेक ने सोमवार को कहा कि उसने देश में 22 स्थानों पर 26,000 प्रतिभागियों के साथ भारत में अपने कोरोना वायरस (कोविड-19) वैक्सीन कोवाक्सिन के तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षण की शुरुआत कर दी है। हैदराबाद स्थित ड्रगमेकर ने एक बयान में कहा कि यह परीक्षण भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किया जाएगा।

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भारत बायोटेक ने बयान में कहा, पूरे भारत में तीसरे चरण के परीक्षण आईसीएमआर के साथ भागीदारी में आयोजित किया जाएगा। इसमें 26,000 स्वयंसेवक शामिल होंगे। यह भारत में कोविड-19 वैक्सीन के लिए आयोजित सबसे बड़ा नैदानिक परीक्षण है। यह कोविड-19 वैक्सीन के लिए भारत का पहला तीसरे चरण का प्रभावकारिता अध्ययन है और भारत में अब तक का सबसे बड़ा प्रभावकारिता परीक्षण है।


परीक्षण भारत के नैदानिक परीक्षण रजिस्ट्री के साथ पंजीकृत किया गया है और इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) द्वारा अनुमोदित किया गया है। परीक्षण स्वयंसेवकों को लगभग 28 दिन दो इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन प्राप्त होंगे। स्वयंसेवक 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
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कंपनी ने अपने बयान में कहा, प्रतिभागियों को कोवाक्सिन या प्लेसिबो प्राप्त करने के लिए यादृच्छिक (रैंडम) रूप से चुना जाएगा। परीक्षण डबल ब्लाइंडिड है, यानी कि जांचकर्ताओं, प्रतिभागियों और कंपनी को यह पता नहीं होगा कि कौन सा स्वयंसेवक किस समूह का है। सुरक्षा और प्रतिरक्षण डाटा के साथ पहले और दूसरे चरण के नैदानिक परीक्षणों में कोवाक्सिन का मूल्यांकन किया गया है।
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भारत का स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन कोवाक्सिन भारत बायोटेक के बीएसएल-3 (बायो-सेफ्टी लेवल 3) जैव नियंत्रण सुविधा में विकसित और निर्मित है। भारत में कोवाक्सिन का विकास और नैदानिक मूल्यांकन कोरोना वायरस टीकाकरण के लिए मील का पत्थर है। भारत बायोटेक की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एला ने कहा, 'भारतीय कंपनियों के लिए विशेष रूप से महामारी के दौरान स्वदेशी टीकों को नया रूप देना और उसे विकसित करना महत्वपूर्ण है।'

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