राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के 'मंदिर-मस्जिद' विवाद नहीं उठाने के बयान पर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि संघ प्रमुख के बयान का उद्देश्य लोगों को गुमराह करना है। यह दिखाता है कि आरएसएस की कार्यप्रणाली कितनी खतरनाक है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भागवत सोचते हैं कि ऐसे बयान देने से आरएसएस के 'पाप' धुल जाएंगे लेकिन देश हकीकत जानता है।
गौरतलब है कि जयराम रमेश के ये बयान संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर आए हैं। संघ प्रमुख ने पुणे में नए मंदिर-मस्जिद विवादों के फिर से उभरने पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ व्यक्तियों को यह विश्वास हो गया है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर "हिंदुओं के नेता" बन सकते हैं।
जयराम रमेश ने संघ प्रमुख पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संघ प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस प्रमुख अपने बयान के प्रति वाकई ईमानदार हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से घोषणा करनी चाहिए कि भविष्य में संघ कभी भी ऐसे नेताओं का समर्थन नहीं करेगा जो सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालते हैं। उन्होंने आगे कहा कि लेकिन वे ऐसा नहीं कहेंगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर-मस्जिद का निर्माण आरएसएस के इशारे पर हो रहा है। कई मामलों में, जो लोग ऐसे विभाजनकारी मुद्दों को भड़काते हैं और दंगे कराते हैं उनका आरएसएस से संबंध है। वे बजरंग दल, विश्व हिंदू से जुड़े हुए हैं। परिषद या बीजेपी और आरएसएस उन्हें वकील दिलाने से लेकर केस दायर करने तक पूरी मदद करते हैं।
भागवत का बयान केवल समाज को गुमराह करने के लिए
एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि यह साफ है कि भागवत का बयान केवल समाज को गुमराह करने के लिए है। उन्हें लगता है कि ऐसी बातें कहने से आरएसएस के पाप धुल जाएंगे और उनकी छवि सुधर जाएगी। लेकिन उनकी हकीकत देश के सामने है।
मोहन भागवत का बयान आरएसएस की खतरनाक कार्यप्रणाली को दर्शाता है। उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। आरएसएस जिस तरह से काम करता है वह आजादी के समय की तुलना में आज अधिक खतरनाक है। वे जो कहते हैं उसके विपरीत करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मोहन भागवत को लगता है कि मंदिर-मस्जिद का मुद्दा उठाकर राजनीति करना गलत है तो उन्हें बताना चाहिए कि उनका संघ ऐसे नेताओं को संरक्षण क्यों देता है? क्या मोहन भागवत की राय आरएसएस-बीजेपी में स्वीकार नहीं की जाती है?
क्या बोले थे मोहन भागवत?
बता दें कि सहजीवन व्याख्यानमाला में भारत-विश्वगुरु विषय पर बोलते हुए भागवत ने एक समावेशी समाज की आवश्यकता की बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया को यह दिखाना चाहिए कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ शांति से रह सकते हैं।
राम मंदिर के निर्माण के बारे में उन्होंने कहा कि यह सभी हिंदुओं की आस्था से जुड़ा मामला था। लेकिन अब कुछ लोग नए विवाद उठाकर समाज में तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। भागवत ने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दे उठाना और समाज में विवाद फैलाना जारी नहीं रह सकता। हाल ही में मंदिरों के सर्वेक्षण के लिए मस्जिदों से जुड़े मामलों की मांग अदालतों में उठी है, लेकिन भागवत ने इस बारे में किसी का नाम नहीं लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बाहर से आए समूह अपनी कट्टरता के साथ आए हैं और पुराने शासन की वापसी चाहते हैं, लेकिन अब देश संविधान के अनुसार चलता है। अब देश में लोग अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और सत्ता का केंद्रीकरण खत्म हो चुका है।