उन्होंने कहा, ‘‘गीता, वेद और उपनिषद् धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रकृति के ग्रंथ हैं। इन्हें केवल मंदिरों तक सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि जीवन जीने के एक रास्ते के तौर पर आम आदमी तक भी पहुंचाना चाहिए।‘‘ मंत्री ने कहा, ‘‘अगर कुरान और बाइबिल की प्रतियां नि:शुल्क मुहैया कराई जाती हैं तो उन्हें भी कॉलेजों में वितरित किया जाएगा।’’
इस साल जुलाई में मुंबई क्षेत्र के संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा कार्यालय ने एक पत्र जारी कर शहर में एनएएसी ‘ए’ और ‘ए+’ रैंकिंग वाले कॉलेजों से उनके कार्यालय से गीता की प्रतियां एकत्रित करने के लिए कहा था। हालांकि पत्र में यह जिक्र नहीं था कि किस समूह या संगठन ने वितरण के लिए प्रतियां दी थीं। इस कदम से विवाद पैदा हो गया था। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे शैक्षिक व्यवस्था का ‘‘भगवाकरण’’ करने की कोशिश करार दिया।
तावड़े ने कहा कि जब भिवंडी का भक्तिवेदांत ट्रस्ट कॉलेजों में गीता की प्रतियां वितरित करना चाहता था तो उन्होंने उससे कहा था कि सरकार खुद से ऐसा नहीं कर सकती लेकिन वे उन कॉलेजों की सूची दे सकती है जिन्हें गीता की प्रतियां मुहैया कराई जा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अधिकारियों से उनकी (ट्रस्ट) मदद करने के लिए कहा लेकिन गीता भक्त खुद कॉलेज गए और प्रतियां वितरित कीं।’’