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BFI: बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह को हाईकोर्ट से झटका, चुनाव प्रभावित करने वाले निर्णयों पर रोक

Wed, 19 Mar 2025 11:02 PM IST
Mayank Tripathi डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति मिनी पुष्करना ने दिल्ली एमेच्योर मुक्केबाजी संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) द्वारा 7 मार्च के परिपत्र के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है।
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अजय सिंह - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि उसके संबद्ध राज्य इकाइयों के केवल निर्वाचित सदस्य ही आगामी चुनावों में अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करना ने दिल्ली एमेच्योर मुक्केबाजी संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) द्वारा 7 मार्च के परिपत्र के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है।
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अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की प्रक्रिया परिणामों की घोषणा के साथ जारी रहेगी, लेकिन यह याचिका पर उसके निर्णय के अधीन है। न्यायालय ने कहा, यह स्पष्ट किया जाता है कि चुनाव प्रक्रिया 7 मार्च के परिपत्र के प्रभाव और संचालन से अलग जारी रहेगी। चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे, जो वर्तमान याचिका के परिणाम के अधीन होंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुक्केबाजी अध्यक्ष अजय सिंह के आदेश को खारिज कर दिया जिसमें उनके एक आदेश के कारण कुछ प्रत्याशियों को निर्वाचन मंडल में प्रवेश करने से रोका गया था। उनके लिए अब रास्ता साफ हो गया है। 

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के चल रहे चुनावों के संदर्भ में कहा जा रहा है कि अध्यक्ष अजय सिंह ने कार्यकारी बोर्ड से परामर्श किए बिना चुनावों की देखरेख के लिए अपनी पसंद के एक निर्वाचन अधिकारी को नियुक्त किया और फिर 4 मार्च को चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद 7 मार्च को एक आदेश निकाल दिया, जिससे राज्यों के कुछ प्रत्याशियों के निर्वाचन मंडल में प्रवेश पर रोक लग गई। आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में मनमाने निर्णय लिए जा रहे थे जिस पर माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है और बीएफआई अध्यक्ष के अवैध आदेश को खारिज कर दिया है। इससे अब निष्पक्ष भागीदारी की अनुमति मिलेगी।
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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि बीएफआई अध्यक्ष का कदम उनकी सुविधा के आधार पर था क्योंकि 2016 के चुनावों के दौरान उनका अपना नाम उत्तराखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि के रूप में निर्वाचक मंडल में शामिल किया गया था, जबकि वह एसोसिएशन के निर्वाचित सदस्य नहीं थे, बल्कि केवल नामांकन के आधार पर ऐसा किया गया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय पर खिलाड़ियों व खेल प्रशासकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
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