एफएसएसएआई का कहना है कि फंगस लगने की शिकायतें मिलने के बाद विदेश से आने वाली सुपारी की खेप को रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम प्रणाली के जरिए मंजूरी दी जाएगी और मंजूरी देने से पहले उनके नमूने और टेस्टिंग भी की जाएगी।
रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम प्रणाली के तहत विदेश से आयात होने वाले सामान को आयातकों द्वारा दिए जाने वाले स्वयं मूल्यांकन घोषणापत्र के आधार पर मंजूरी देने का प्रावधान है। इन खेपों में अधिकांश को अधिकृत अधिकारी अपनी स्वेच्छा से कोई मूल्यांकन और परीक्षण की आवश्यकता नहीं कहकर आगे रवाना कर देते हैं।
एफएसएसएआई ने सुपारी की गुणवत्ता को लेककर कुछ मानक जारी किए हैं। पिछले साल एफएसएसएआई ने सुपारी में एफ्लाटोक्सिन की मात्रा को लेकर एक्ट में कुछ जरूरी संशोधन भी किए थे। गौरतलब है कि कुछ शोधों के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुपारी को कैंसर का कारण बनने वाले पदार्थ के रूप में चिन्हित किया है, जिसका मुंह और गले के कैंसर से सीधा संबंध है।
वहीं जर्नल ऑफ द अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन का कहना है कि सुपारी खाने वालों में सबम्यूकस फाइब्रोसिस बीमारी के चलते जबड़े के मूवमेंट और मुंह में अकड़न की समस्या हो सकती है। साथ ही, लंबे समय तक सुपारी खाने से दांतों का रंग बदल जाता है और वे कमजोर भी हो जाते हैं।