सात साल में उच्च शिक्षा में बेटियों का आंकड़ा 14 गुना से भी ज्यादा हो गया है। इसका श्रेय मोदी सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को भी दिया जा रहा है। सात साल पहले उनकी संख्या 12 लाख थी तो अब बढ़कर एक करोड़ 74 लाख तक पहुंच गई है।
उच्च शिक्षा में बेटियों की तादाद 14 गुना से ज्यादा
ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2017-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2010-11 में उच्च शिक्षण संस्थानों में 12 लाख युवतियां थीं। वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा एक करोड़ 74 लाख पर है। वर्ष 2016 के मुकाबले छात्राओं के एनरोलमेंट में करीब एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के ग्रास एनरोलमेंट रेश्यो में 18-23 आयु वर्ग के तहत कुल आंकड़ा 25.8 फीसदी है। इसमें 26.3 फीसदी लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 25.4 फीसदी है, जो कि एक फीसदी से कम हैं।
महज सात साल में आंकड़ा 12 लाख से 1 करोड़ 74 लाख पहुंचा
वर्ष 2010-11 में बेटियों का आंकड़ा 17.9 फीसदी था। एमफिल में 70 फीसदी और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में 40 फीसदी एनरोलमेंट छात्राओं का है। चंडीगढ़ में बेटियों की का ग्रास एनरोलमेंट रेश्यो 67.7 फीसदी, दिल्ली में 48 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 42.2 फीसदी, हरियाणा में 30.7 फीसदी, जम्मू कश्मीर में 29, उत्तर प्रदेश में 26.7, उत्तराखंड में 36.3 फीसदी है।
साइंस और आटर्स एस्ट्रीम पसंदीदा
रिपोर्ट के मुताबिक, बेटियों की पहली पसंद साइंस और आटर्स एस्ट्रीम है। उक्त दोनों प्रोग्राम में 45 फीसदी से अधिक बेटियों ने दाखिला लिया है। देशभर में 20,041 हॉस्टल लड़कों और 23,121 हॉस्टल लड़कियों के हैं। एमए, एमकॉम, एमएससी, मॉस्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस, मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी, आर्किटेक्चर, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, फैशन मैनेजमेंट, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, लॉ, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, कंप्यूटर एडमिनिस्ट्रेशन, मास्टर ऑफ साइंस इन नर्सिंग में युवतियां सर्वाधिक दाखिले ले रही हैं।