कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु सेफ सिटी परियोजना खटाई में पड़ गई है। एक आईपीएस अधिकारी के 619 करोड़ रुपये की बेंगलुरु सेफ सिटी परियोजना की निविदा संबंधित गोपनीय जानकारी हासिल करने की शिकायत की गई। इसे लेकर पुलिस ने मुख्य सचिव टीएम विजय भास्कर के पास शिकायत की। साथ ही उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
स्थानीय पुलिस ने उस वक्त मुख्य सचिव से एक आईपीएस अधिकारी के परियोजना संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने को लेकर शिकायत की, जब परियोजना के डिजाइन, कार्यान्वयन और रखरखाव के लिए सेवा प्रदाता का चयन करने की प्रक्रिया चल रही थी। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इससे संभावना है कि बेंगलुरु सेफ सिटी में अब लटक सकती है। सेफ सिटी परियोजना के तहत बेंगलुरु में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 7,500 विभिन्न प्रकार के निगरानी कैमरों की स्थापना की परिकल्पना की गई है।
सेफ सिटी परियोजना
केंद्र सरकार ने सेफ सिटी परियोजना की शुरुआत शहरों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। निर्भया कोष से संचालित होने वाली ‘सेफ सिटी परियोजना’ के लिए चयनित देश के आठ महानगरों में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद शामिल हैं। इस परियोजना को गृह मंत्रालय द्वारा महिला और बाल विकास मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ संबंधित शहरों और नागरिक समाज के नगर निगम और पुलिस आयुक्तों के साथ मिलकर कार्यान्वित किया जा रहा है।
सेफ सिटी परियोजना के तहत ये कार्य
- मौजूदा आशा ज्योति केंद्र के परामर्शदाताओं के साथ सभी पुलिस स्टेशनों में महिला सहायता डेस्क की स्थापना होगी।
- एक एकीकृत स्मार्ट नियंत्रण कक्ष की स्थापना। महिलाओं द्वारा शिकायत दर्ज करने में आसानी के लिए पिंक आउट-पोस्ट (विशेष रूप से महिला पुलिस द्वारा प्रशासित) की स्थापना ।
- कैमरों सहित बसों में सुरक्षा उपायों को लागू करना
- चिन्हित अपराध हॉटस्पॉट क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटिंग में सुधार करना
- पिंक शौचालय की स्थापना