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Bengaluru Stampede: '2.5 लाख लोग फ्री एंट्री सोचकर आए', कर्नाटक सरकार ने कोर्ट को बताया; अब 10 जून को सुनवाई

Thu, 05 Jun 2025 03:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

बंगलूरू के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में भगदड़ मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने घटना का स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत में दोपहर 2.30 बजे मामले की सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने में कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने कहा कि इस मामले में दोषारोपण के लिए कोई जगह नहीं है।
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बंगलूरू में हुई भगदड़ की तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम के पास हुई भगदड़ से संबंधित मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि हमने महाधिवक्ता के समक्ष अपनी बात रखी है। उन्होंने एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है, जिसे रिकॉर्ड में लिया गया है। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि इस स्वत: संज्ञान को स्वत: संज्ञान रिट याचिका के रूप में पंजीकृत किया जाए। कोर्ट ने 10 जून, मंगलवार को याचिका को फिर से सूचीबद्ध करने के कहा।

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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि हम सबसे पहले यह अनुरोध करना चाहेंगे कि कोई दोषारोपण न हो। हम केवल तथ्यों को उसी रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं, जैसा कि वे घटित हुए थे। हम कोई प्रतिकूल दृष्टिकोण नहीं अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1000 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया था। स्टेडियम की क्षमता 35,000 है। आमतौर पर केवल 30,000 टिकट ही बिकते हैं। इस बार लगभग 2.5 लाख लोग यह सोचकर आए कि प्रवेश निःशुल्क है।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) शशि किरण शेट्टी ने बताया कि समारोह में नि:शुल्क प्रवेश की घोषणा के कारण भारी भीड़ उमड़ी, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को विरोधात्मक तरीके से देखने का इरादा नहीं रखती है, बल्कि यह समझने का प्रयास कर रही है कि चूक कहां हुई ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न दोहराई जाएं। महाधिवक्ता ने बताया कि पूरे शहर में सुरक्षा बल तैनात थे, लेकिन चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर स्थिति अनियंत्रित हो गई। हर व्यक्ति यह सोच रहा था कि बस वह एक और अंदर जा रहा है, जबकि असल में वहां भारी जनसैलाब था।
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कोर्ट ने क्या कहा? 
कोर्ट ने कहा कि ऐसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) होनी चाहिए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ऐसी जगहों पर एम्बुलेंस और निकटवर्ती अस्पतालों की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। इस पर महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि एम्बुलेंस मौजूद थीं, लेकिन इतनी बड़ी आपात स्थिति के लिए पर्याप्त नहीं थीं।

महाधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है और यह 15 दिनों में पूरी हो जाएगी। सभी मौतें और घायल होने की घटनाएं कुल 21 में से केवल तीन गेटों पर हुईं।

उन्होंने कोर्ट को बताया, सरकार ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है और सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, जिसमें कार्यक्रम प्रबंधन एजेंसी भी शामिल है। हम संभावित चूकों की जांच कर रहे हैं, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।  जांच अधिकारी ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर लोगों से साक्ष्य और जानकारी साझा करने की अपील की है। सभी गवाहियों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी और अदालत में पेश की जाएगी। पूरी पारदर्शिता है, कुछ भी छिपाया नहीं जा रहा है।

इस मामले में एक याचिकाकर्ता अधिवक्ता लोहित ने अदालत के समक्ष चार महत्वपूर्ण प्रश्न रखे:

  1. इस कार्यक्रम को किसने अधिकृत किया, राज्य सरकार ने या क्रिकेट संघ ने?
  2. उन खिलाड़ियों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी सरकार की क्यों बनी, जिन्होंने न राज्य का न देश का प्रतिनिधित्व किया?
  3. यह कार्यक्रम विधानसौधा और स्टेडियम के बीच क्यों विभाजित किया गया?
  4. भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?

पीआईएल याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता जी आर मोहन ने बताया कि मुफ्त प्रवेश की घोषणा आईपीएल फ्रेंचाइजी के प्रतिनिधि द्वारा की गई थी। भारी भीड़ के बावजूद, केवल तीन गेट खुले रखे गए, जिससे अड़चनें और अराजकता पैदा हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणा श्याम ने अदालत से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त करने पर विचार करने का आग्रह किया।



1,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे
कर्नाटक सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शहर के पुलिस आयुक्त, डीसीपी और एसीपी समेत 1,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास तैनात थे। यह बात डीके शिवकुमार के उस दावे के एक दिन बाद कही गई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 5,000 पुलिसकर्मी मौजूद थे। सरकार ने कहा कि पानी के टैंकर, एंबुलेंस और कमांड और कंट्रोल वाहन भी मौजूद थे। यह इंतजाम पिछले मैचों के दौरान किए गए काम से कहीं ज्यादा थे।

घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
बुधवार को हुई इस घटना में 11 लोगों की मौत हो गई और 50 ज्यादा लोग घायल हो गए थे। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बंगलूरू शहरी उपायुक्त के नेतृत्व में घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। घटना तब हुई, जब बड़ी संख्या में लोग रॉयल चैंलेजर्स बेंगलुरु टीम की आईपीएल जीत के जश्न में भाग लेने के लिए चिन्नास्वामी स्टेडियम में उमड़ पड़े थे। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की पीठ ने की। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने दलीलें पेश कीं।

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