सर्जरी के बाद चेहरा बिगडने पर एक टीवी एक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलाज करने वाले करीब एक दर्जन डॉक्टरों पर दावा ठोका है। याचिकाकर्ता एक्टर ने कहा कि उसे मुआवजा मिलना चाहिए क्योंकि चेहरा बिगड़ने से उसके करियर पर प्रतिकूल असर पड़ा।
न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ टीवी एक्टर मृणमॉय दत्ता की इस याचिका पर शीर्ष अदालत ने एम्स को विशेषज्ञों केएक बोर्ड का गठन कर उसके दावे की जांच करने का निर्देश दिया है। एक्टर ने डॉक्टरों पर चिकित्सा में कोताही बरतने का आरोप लगाया है। दत्ता ने कुछ बंगाली टीवी सीरियल और फिल्मों में काम किया है।
व्यक्तिगत रूप से पेश होकर मृणमॉय दत्ता ने पीठ से कहा कि नाक की सर्जरी और इलाज के कारण उसका चेहरा बिगड़ गया, जिससे उसका एक्टिंग करियर को नुकसान पहुंचा। दत्ता ने बताया कि वर्ष 1986 से उसका इलाज चल रहा है लेकिन वह वर्ष 2005 के बाद से उपचार करने वाले डॉक्टरों पर मुआवजे का दावा कर रहे हैं। याचिका में करीब एक दर्जन डॉक्टरों को प्रतिवादी बनाते हुए एक्टर ने एक करोड़ रुपये का दावा ठोका है।
पीठ ने एक्टर की याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए कहा कि पहले यह जानना जरूरी है कि क्या इस मामले में चिकित्सकीय लापरवाही हुई है या नहीं? अगर हुई है तो किससे हुई। पीठ ने एक्टर को वर्ष 1986 केबाद केतमाम दस्तवाजों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
पीठ ने एम्स को विशेषज्ञों डॉक्टरों के एक बोर्ड का गठन कर एक्टर के दावों का परीक्षण करने के लिए कहा है। विशेषज्ञों की इस टीम को यह पता लगाना है कि क्या इस मामले में चिकित्सकीय लापरवाही हुई है या नहीं। मेडिकल बोर्ड को परीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।