तो क्या शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल को एक मॉडल राज्य के तौर पर पूरे देश के समक्ष पेश किया जाएगा? शराब निर्माताओं के संगठन आल इंडिया वाइन प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की मंशा तो यही लगती है। वह चाहता है कि बंगाल की तर्ज पर दूसरे राज्य भी ड्राई डे की तादाद में कटौती कर दें।
ध्यान रहे कि राज्य सरकार ने हाल में राज्य में ड्राई डे की तादाद में कटौती करने के साथ ही तीन सितारा और उसके ऊपर के होटलों को पूरे साल शराब बेचने की अनुमति दे दी है। आबकारी विभाग के सूत्रों ने बताया कि एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हाल में एक मुलाकात के दौरान सरकार के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा था कि इससे शराब की बिक्री तो बढ़ेगी ही, सरकार को भी अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। एसोसिएशन का कहना है कि बंगाल की मिसाल को सामने रखते हुए वह दूसरे राज्यों में भी संबंधित सरकारों से ऐसा कदम उठाने का अनुरोध करेगा।
पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री ने वर्ष 2016-17 के दौरान आबकारी के मद में 4,698.29 करोड़ का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2015-16 में यह रकम 3,981.59 करोड़ थी। वैसे, सरकार ने अब तक आबकारी की दर में किसी बढ़ोतरी का ऐलान नहीं किया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि त्योहारी सीजन के बाद सरकार इस दर को बढ़ाने का फैसला कर सकती है। एक अधिकारी ने कहा कि सरकार शराब की बिक्री को बढ़ावा देकर इसके जरिए मिलने वाले राजस्व को बढ़ाना चाहती है। यही वजह है कि शराब की बिक्री से संबंधित नियमों को लचीला बनाया गया है। ड्राई डे की तादाद में कटौती सरकार की इसी योजना का हिस्सा है।