पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर लोकसभा में कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ गई।
क्या है पूरा मामला?
ऋतब्रत ने पलटवाल में क्या कहा?
शुक्रवार का दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए काफी हलचल भरा रहा। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को 'अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूल और घास' चिन्ह को निरस्त करने की घोषणा की थी, लेकिन शुक्रवार को उसने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को नए नाम और चिन्ह आवंटित कर दिए।
ममता की पार्टी को क्या चिन्ह मिला?
जहां ममता बनर्जी की पार्टी को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चिन्ह आवंटित किया गया, वहीं ऋतब्रत के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट को चुनाव आयोग द्वारा 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' का नया चिन्ह आवंटित किया गया।
चुनाव आयोग के उस फैसले के तुरंत बाद, नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की पूर्व उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इसके बाद अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के लिए अपने समर्थन की घोषणा की, जिन्हें उस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उनके खिलाफ दर्ज हत्या के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।