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West Bengal: TMC की पंचायत चुनावों में भारी जीत, लोकसभा चुनाव से पहले ग्रामीण इलाकों में खुद को किया मजबूत

Thu, 13 Jul 2023 07:47 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

राज्य चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणामों के मुताबिक, टीएमसी ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सभी 20 जिला परिषदों में सीधे 880 सीटें जीतीं, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा 928 सीटों में से सिर्फ 31 सीटें जीत सकी। कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि दो सीटें अन्य के खाते में गईं।
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : Facebook/ Mamata Banerjee
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के ग्रामीण चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भारी जीत दर्ज की है। राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी ने सभी 20 जिला परिषदों पर कब्जा कर अपने प्रतिद्वंद्वियों को काफी पीछे छोड़ दिया। राज्य चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणामों के मुताबिक, टीएमसी ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सभी 20 जिला परिषदों में सीधे 880 सीटें जीतीं, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा 928 सीटों में से सिर्फ 31 सीटें जीत सकी। कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि दो सीटें अन्य के खाते में गईं।

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इसके अलावा टीएमसी ने 63,219 ग्राम पंचायत सीटों में से 35,000 से अधिक सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि, अभी आधिकारिक नजीते घोषित नहीं किए गए हैं। भाजपा ने लगभग 10,000 ग्राम पंचायत सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन ने 6,000 से अधिक सीटें जीतीं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी ने बिना हिंसा का सहारा लिए ग्रामीण चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा था, जिससे पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले अपने ग्रामीण आधार को मजबूत करने में मदद मिल सके। साथ ही इसके जरिए भ्रमित शहरी मतदाताओं को भी आश्वस्त करना था।  पार्टी अपने इस लक्ष्य में काफी हद तक सफल भी दिख रही है।
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2019 के आम चुनावों में भाजपा ने टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी। जिससे लोकसभा में उसकी सीटें घटकर सिर्फ 22 रह गईं। भाजपा को भारी फायदा हुआ था और वह 18 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बंगाल की सत्ता पर काबिज होने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वह अपने मकसद में असफल रही। टीएमसी भाजपा को सिर्फ 77 विधानसभा सीटों तक सीमित रखने में सक्षम रही और 294 सदस्यीय विधानसभा में 215 सीटें जीतकर भारी जनादेश हासिल किया।

दार्जिलिंग में बीजीपीएम प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी
पंचायत चुनावों में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) पश्चिम बंगाल की उत्तरी पहाड़ियों में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक दल के रूप में उभरी है। इसके उम्मीदवारों ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिले में बड़ी संख्या में पंचायत सीटें जीती हैं। राज्य के बाकी हिस्सों में त्रिस्तरीय चुनावों के मुकाबले, दोस्तरीय पंचायत चुनाव 23 साल बाद 8 जुलाई को गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के तहत क्षेत्र में हुए, जो पहले से ही बीजीपीएम द्वारा नियंत्रित एक अर्ध-स्वायत्त परिषद है। जिला प्रशासन की ओर से जारी नवीनतम परिणामों के अनुसार, जीटीए के मुख्य कार्यकारी अनित थापा के नेतृत्व वाली बीजीपीएम ने दार्जिलिंग जिले की 70 ग्राम पंचायतों में 598 सीटों में से 349 पर कब्जा किया है।

जीत के बाद भाजपा के नौ उम्मीदवारों ने असम में ली शरण
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में जीतने वाले भाजपा नौ उम्मीदवार और एक माकपा प्रत्याशी ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के हमले के भय से असम में शरण ली है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इससे पहले मंगलवार को कहा था कि पश्चिम बंगाल के 133 लोगों ने पंचायत चुनाव की हिंसा के कारण राज्य में शरण ली है। धुबरी के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रसेनजीत दत्ता ने कहा कि शरण लेने वालों को भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।

शांतिपूर्ण चुनाव कराने में विफल रही बंगाल सरकार : हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई हिंसा को लेकर राज्य चुनाव आयोग और ममता बनर्जी सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, आयोग अपना कर्तव्य निभाने में पूरी तरह विफल रहा। चुनाव के बाद राज्य सरकार भी हिंसा नियंत्रित करने में नाकाम रही। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस शिवगणम और जस्टिस हिरण्यमय भट्टाचार्य की खंडपीठ नेे इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा, सरकार अगर राज्य के लोगों की रक्षा नहीं कर सकती, तो सोचना होगा। विजयी प्रत्याशी अभी जीत नहीं मानें, क्योंकि पहले कोर्ट देखेगा कि हिंसामुक्त और निष्पक्ष चुनाव हुए हैं कि नहीं।
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