पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले 1 मार्च से तैनात होने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों को आवंटित वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाए जाएंगे। ताकि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक लगातार यह निगरानी कर सकें कि तैनात सीएपीएफ कर्मियों का पहले दिन से ही प्रभावी ढंग से उपयोग हो रहा है या नहीं।
चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि सीएपीएफ की 240 कंपनियों का पहला चरण, जिन्हें 1 मार्च को तैनात किया जाना है (मतदान तिथियों की घोषणा और आचार संहिता लागू होने से पहले), निष्क्रिय नहीं बैठा रहेगा। पहले दिन से ही उन्हें क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने और राज्य के भूगोल से परिचित होने के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
यह भी पढ़ें- PM Modi Israel Visit: पीएम मोदी के इस्राइल दौरे पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने कहा- यह नैतिक कायरता
कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया
सीईओ कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों में कई शिकायतें मिली थीं कि बड़ी संख्या में सीएपीएफ कर्मियों की तैनाती के बावजूद मतदान के दिनों में भी उनका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया था। सीएपीएफ कर्मियों द्वारा ड्यूटी के दौरान घूमने-फिरने की भी शिकायतें थीं। इसलिए इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने इस बार सीएपीएफ कर्मियों की गतिविधियों पर पहले दिन से ही कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है ताकि शुरू से अंत तक उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।”