पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच करीब 115 प्रमुख सीटों (मुस्लिम बहुल क्षेत्रों) के निर्णायक आंकड़े सामने आ गए हैं। भारत की चुनावी प्रणाली में, अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में एक ही समुदाय की 30% से अधिक सघन आबादी हो, तो वह नतीजे तय करने की ताकत रखती है। अनुमानित रूप से 30 प्रतिशत से अधिक वोटर वाले अधिकतर सीटों की बात करें तो पिछली बार की तुलना में इन सीटों पर बंगाल में सत्ताधारी दल को झटका लगा है।
सत्ता विरोधी लहर के दावों के बावजूद टीएमसी का यह प्रदर्शन राज्य में अल्पसंख्यकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ को दिखाता है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन क्षेत्रों में अपना परंपरागत वोट बैंक नहीं होने के बावजूद 39 सीटों पर कब्जा जमाया है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में टीएमसी और भाजपा के बीच ही सीधा और मुख्य मुकाबला रहा है। पिछली बार के विधानसभा चुनावों में 30 प्रतिशत से अधिक अबादी वाले करीब 85 सीटों में टीएमसी ने 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस और सीपीएम का निराशाजनक प्रदर्शन
इन 115 सीटों के चुनावी गणित में अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। कभी बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली कांग्रेस महज तीन सीटों पर सिमट कर रह गई है। इसके अलावा, हुमायूं कबीर की एजेयूपी को दो सीटें हासिल हुई हैं। वामपंथी खेमे का हाल और भी निराशाजनक रहा। लंबे समय तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहे सीपीएम और एआईएसएफ को चुनाव में मात्र एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा है। इन 115 सीटों के चुनावी परिणाम साफ तौर पर बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण का संकेत देते हैं। टीएमसी का 69 सीटों पर जीत दर्ज करना यह साबित करता है कि पार्टी का अपने मुख्य वोट बैंक पर नियंत्रण बरकरार है। वहीं, 39 सीटों के साथ भाजपा का प्रदर्शन यह भी बताया है कि वह राज्य में एक मजबूत पकड़ के साथ सत्ता पर काबिज होने के लिए तैयार है। कांग्रेस और वामदलों का लगभग सफाया राज्य में एक नए द्विध्रुवीय राजनीतिक समीकरण का खाका तैयार करता है।
आइए जिलावार समझते हैं, अनुमानित रूप से 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम वोटर वाले सीटों पर किस पार्टी का दबदबा रहा।
जिले में अनुमानित रूप से 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम वोटर वाले करीब नौ सीटों में से पांच सीटों पर तृणमूल कांग्रेस और चार सीटों पर भारतीय जनता पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है।
मालदा जिले की नौ सीटों में टीएमसी छह सीटों पर बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में है, जबकि शेष तीन सीटों पर भाजपा आगे चल रही है।
जिले की करीब 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम वोटर वाले 22 सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है; नौ सीटों पर टीएमसी और आठ सीटों पर भाजपा जीत की ओर अग्रसर है। इसके अलावा, कांग्रेस और एजेयूपी दो-दो सीटों पर, जबकि सीपीएम सीपीएम एक सीट पर आगे है।
इस जिले की छह सीटों पर मुकाबला पूरी तरह से बराबरी का है। यहां तीन सीटों पर टीएमसी और तीन सीटों पर भाजपा आगे चल रही है।
जिले की 11 सीटों पर टीएमसी का शानदार प्रदर्शन है, जो नौ सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि भाजपा केवल दो सीटों पर आगे है।
जिले की कुल 20 सीटों में टीएमसी 17 सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही है। अन्य तीन सीटों में से भाजपा, कांग्रेस और एआईएसएफ एक-एक सीट पर आगे हैं।
- कोलकाता (दक्षिण और उत्तर)
कोलकाता दक्षिण की दो सीटों और कोलकाता उत्तर की दो सीटों पर टीएमसी अपना परचम लहराती दिख रही है।
हावड़ा जिले की 11 सीटों में से आठ सीटों पर टीएमसी आगे है, जबकि तीन सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली है।
इस जिले की 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले दो सीटों पर मुकाबला बराबरी का है, जिसमें 1 सीट पर टीएमसी और 1 सीट पर भाजपा आगे है।
- मेदिनीपुर (पूर्ब और पश्चिम)
पूर्ब मेदिनीपुर की एक सीट पर भाजपा जीत की ओर बढ़ रही है। वहीं, पश्चिम मेदिनीपुर की दो सीटों में से एक सीट टीएमसी के खाते में और एक सीट भाजपा के खाते में गई है।
- बर्धमान (पूर्व और पश्चिम)
पूर्व बर्धमान जिले की सात सीटों में भाजपा का जबरदस्त प्रदर्शन है; पार्टी यहां छह सीटों पर आगे है, जबकि टीएमसी मात्र एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। पश्चिम बर्धमान की एक सीट पर भाजपा आगे है।
बीरभूम जिले के 10 सीटों में दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधी टक्कर है, जहां टीएमसी और भाजपा ने पांच-पांच सीटों पर जीत दर्ज की है।