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बंगाल: भाजपा पर कोरोना की मार, आखिरी तीन चरणों की 112 सीटों में से 90 पर हार

Sun, 02 May 2021 09:24 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार को जारी मतगणना के अब तक आए रुझानों व नतीजों से साफ है कि राज्य टीएमसी की वापसी हो रही है। इस बार चुनावी राज्यों में सबकी नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी थीं और वहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता की हैट्रिक लगाती दिख रही हैं।
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पीएम मोदी, अमित शाह और ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बंगाल में पुरजोर कोशिशों के बाद भी भाजपा अपना मिशन पूरा नहीं कर पाई। शुरुआती चरणों में टीएमसी को कड़ी टक्कर देने वाली भाजपा पर आखिरी तीन चरणों में कोरोना वायरस की मार पड़ गई। आखिरी तीन चरणों में भाजपा को अधिकतर सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।  

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चार प्रदेशों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के चुनाव की ही रही। यहां पर तृणमूल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में आक्रामक चुनाव प्रचार किया तो भाजपा ने वहां पहली बार सत्ता में आने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई दूसरे बड़े चेहरों ने पश्चिम बंगाल में धुआंधार चुनाव प्रचार किया। कई दशकों तक पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज रहे वाम दलों और कांग्रेस का इस चुनाव में सफाया हो गया।

भाजपा ने यहां ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने के लिए पूरा जोर लगाया। जबरदस्त चुनाव प्रचार किया, प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री और तमाम दूसरे केंद्रीय मंत्रियों ने अपनी ताकत झोंकी लेकिन ये काम नहीं आया। दरअसल, आखिरी तीन चरण के चुनाव में भाजपा का खेल पूरी तरह बिगड़ गया। मतदान आठ चरणों में हुआ था। पहले पांच चरणों में भाजपा ने टीएमसी को कड़ी टक्कर दी। लेकिन अगले तीन चरण उसके लिए भारी साबित हुए। इन तीन चरणों की 112 में से 90 सीटों पर भाजपा को हार मिली। 
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पश्चिम बंगाल विधानसभा की 292 सीटों के लिए जारी मतगणना में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 202 सीटों पर बढ़त के साथ राज्य में सत्ता पर फिर से काबिज होती दिख रही है, जबकि भाजपा 81 सीटों पर आगे है। पिछले विधानसभा चुनाव में महज तीन सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन वह अपने अभियान में सफल नहीं हो सकी।

कड़ा मुकाबला होने के अनुमानों को धता बताते हुए, तृणमूल कांग्रेस तेजी से प्रचंड जीत की ओर बढ़ती दिख रही है और अगर मौजूदा रुझान परिणामों में तब्दील होते हैं तो पार्टी बेहद आसानी से लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाएगी। अबतक जितने मतों की गणना हो गई है, उसके अनुसार तृणमूल कांग्रेस को 48.3 फीसदी और भाजपा को 38.7 फीसदी वोट मिले हैं।

आठवें चरण में 35 सीटें 
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में 78.32 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। अंतिम चरण में 35 सीटों के लिए हुए मतदान हुआ था। अधिकतर सीटों पर टीएमसी ने कब्जा जमाया। इस चरण में मालदा की छह, मुर्शिदाबाद  की 11 कोलकाता नॉर्थ की सात और बीरभूम की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ था। 

सातवें चरण में 34 सीटें 
पश्चिम बंगाल विधानसभा के सातवें चरण के चुनाव में 75 फीसदी से अधिक मतदान हुआ था। इस चरण में कुल 34 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ था। सातवें चरण में मुर्शिदाबाद और पश्चिम वर्द्धमान जिलों की नौ विधानसभा सीटों और दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जिलों की छह-छह सीटों और कोलकाता की चार सीटों पर मतदान हुआ था। 

छठे चरण में 43 सीटें 
पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए छठे चरण के चुनाव में 43 सीटों के लिए मतदान हुआ था। इस चरण में पश्चिम बंगाल के चार जिले उत्तर 24 परगना (17 सीटें), नादिया जिला ( 9 सीटें), उत्तर दिनाजपुर जिला ( 9 सीटें) और पूर्ब बर्द्धमान (8 सीटें) में वोटिंग हुई थी। 
 
भाजपा पर कोरोना वायरस की मार
दरअसल, पांच चरण के चुनाव संपन्न होते-होते देश में कोरोना ने हाहाकार मचा दिया था। छठे चरण का चुनाव 22 अप्रैल को हुआ था। 22 अप्रैल से ही देश में कोरोना वायरस के रोजाना तीन लाख से अधिक मामले सामने आ रहे थे। केंद्र सरकार पर कोरोना से निपटने को लेकर लापरवाही के आरोप लगने लगे थे। विपक्षी दल तो सरकार पर बरस ही रहे थे, सोशल मीडिया पर भी सरकार के खिलाफ गुस्सा नजर आ रहा था। प. बंगाल में भी कोरोना के मामले 7-8 हजार के करीब पहुंचने लगे थे। मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा था। ममता इसे लेकर लगातार पीएम मोदी और केंद्र पर हमलावर थीं। उन्होंने वैक्सीन की कमी को लेकर सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। इस बीच मद्रास हाईकोर्ट ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर सीधे चुनाव आयोग को लापरवाह ठहराते हुए उसे एक तरह से दोषी ही ठहरा दिया। 

इस तमाम बातों ने भाजपा को खासा नुकसान पहुंचाया। देशभर में कोरोना के कारण हो रही मौतों ने देश को हिलाकर रख दिया। इसके लिए विपक्ष ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को दोषी ठहराना शुरू किया। देशभर में वैक्सीन की किल्लत भी सामने आने लगी। भाजपा और केंद्र की तरफ से लगातार सफाई का दौर चला, लेकिन इसका असर होता नहीं दिखा। भाजपा को इसका खामियाजा बंगाल में भुगतना पड़ा। पहले कुछ चरणों तक वह टीएमसी का कड़ा मुकाबला करती दिखी, लेकिन चुनाव संपन्न होते-होते उसकी हालत खराब हो गई और इसका परिणाम मतगणना के दिन नज़र भी आ गया। 

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