पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बुधवार को दावा किया कि राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में वरिष्ठ डॉक्टरों की तरफ से जूनियर डॉक्टरों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए दिए गए सामूहिक इस्तीफे से अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं हुई हैं। अधिकारी ने बताया कि राज्य भर में चल रहे दुर्गा पूजा उत्सव के कारण बाह्य रोगी विभाग में मरीजों की आमद काफी कम रही, हालांकि वरिष्ठ और जूनियर डॉक्टर, आरएमओ और सहायक प्रोफेसर अपने नियमित कर्तव्यों का पालन करने के लिए पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में मौजूद थे।
जूनियर और वरिष्ठ डॉक्टरों का प्रदर्शन
इसी बीच आज कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में जूनियर और वरिष्ठ डॉक्टरों और नर्सों ने प्रदर्शन किया और आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में दुष्कर्म और हत्या की शिकार महिला डॉक्टर के लिए न्याय की मांग की।
स्वास्थ्य विभाग को सामूहिक इस्तीफे की सूचना नहीं
स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, हमें अभी तक डॉक्टरों की तरफ से सामूहिक इस्तीफे के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सामूहिक इस्तीफे की पेशकश करने का ऐसा कोई मानदंड नहीं है। यदि लोग इस्तीफा देना चाहते हैं, तो उन्हें एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करना होगा। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं क्योंकि आज किसी भी अस्पताल में कोई भी डॉक्टर अनुपस्थित नहीं था।
डॉक्टरों का दावा करीब 35 डॉक्टरों ने इस्तीफा
कोलकाता मेडिकल कॉलेज रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, कोलकाता में कई डॉक्टरों और संकाय सदस्यों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अपने सहयोगियों का अनुसरण किया, जिन्होंने मंगलवार को सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था और चिकित्सा शिक्षा निदेशक को अपना सामूहिक इस्तीफा भेज दिया। डॉक्टरों के मंच ने कहा कि सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लगभग 35 डॉक्टरों ने भी कोलकाता में जूनियर डॉक्टरों के विरोध के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
डॉक्टरों के मंच ने अपने पत्र में की मांग
डॉक्टरों के मंच ने अपने सामूहिक इस्तीफे में कहा कि, हम उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के शिक्षक ऐसी दमनकारी परिस्थितियों में अपनी सेवाएं जारी रखने से निराश और हतोत्साहित हैं। जबकि हमारे छात्र और जूनियर आपदा के कगार पर खड़े हैं, हम उच्च अधिकारियों से उनकी मांगों को संबोधित करने और बिना किसी देरी के इस संकट का समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। हालांकि, अब तक ऐसा कोई प्रयास नहीं देखा गया है, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया पश्चिम बंगाल चिकित्सा शिक्षा सेवा से हमारा इस्तीफा स्वीकार करें।
'इस्तीफों का उद्देश्य राज्य सरकार पर दबाव डालना'
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुनीत हाजरा ने बताया कि इस्तीफों का उद्देश्य राज्य सरकार पर दबाव डालना था, जो जूनियर डॉक्टरों की चल रही भूख हड़ताल के दौरान चुप रही है। उन्होंने कहा, हमारा इस्तीफा प्रतीकात्मक है, जिसका उद्देश्य सरकार को चर्चा में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। हम नहीं चाहते कि मरीजों को परेशानी हो। हम उनका इलाज कर रहे हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे, क्योंकि यह हमारा कर्तव्य है और हम नैतिक रूप से ऐसा करने के लिए बाध्य हैं।
त्योहारों के दौरान अस्पतालों के कामकाज के तरीके के बारे में बताते हुए, डॉ. सुनीत हाजरा ने कहा कि ड्यूटी रोस्टर को इस बात को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है कि हर कोई त्योहारों का हिस्सा बन सके। इसलिए, हम जानते हैं कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में उसकी जगह कैसे ली जाए। अस्पतालों में, डॉक्टर के लिए हमेशा एक बैकअप होता है। अगर कोई अनुपस्थित है, तो हम उसे तुरंत बदल सकते हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।