पश्चिम बंगाल के सुंदरवन के भीतर एक शांत गांव में दो युवतियों ने मंदिर में शादी रचाई। यह शादी ऐसे गांव में हुई है, जहां मैंग्रोव वन नदियों की रक्षा करते हैं और परंपराएं बहुत लंबी और गहरी हैं। दोनों युवतियां मंदिर के सामने खड़ी हुईं और उन्होंने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में चुना।
पेशे से नर्तकी रिया सरदार और राखी नस्कर दोनों की उम्र करीब 20 वर्ष है। दोनों ने चार नवंबर को कुलतली ब्लॉक के जलाबेरिया स्थित पालेर चक मंदिर में शादी की। इस समारोह में सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे, जिन्होंने शंख बजाकर और जयकारे लगाकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
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'समलैंगिक विवाह को भारत में अभी कानूनी मान्यता नहीं'
भारत में समलैंगिक विवाह को अभी कानूनी मान्यता नहीं है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में यह प्रेम विवाह एक शांत विद्रोह की तरह था। शादी सुंदरबन के सामाजिक रूप से परंपरागत इलाके में हुई, जहां इस तरह कदम बहुत कम देखने को मिलते हैं। दोपहर मंदिर का आंगन उस समय उल्लास से भर गया, जब दुल्हन बनी रिया और दूल्हे का मुकुट पहने राखी ने मालाएं बदलीं और एक-दूसरे से सात वचन लिए। सभी रस्में एक पुजारी ने संपन्न कराईं। यह देखकर कुछ गांववाले तो हैरान थे, लेकिन अधिकांश ने चुपचाप इस शादी को स्वीकार किया।
विवाह को लेकर रिया और राखी ने क्या कहा?
रिया मंदरबाजार के रामेश्वरपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा, हमने जीवन साथी बनने का वचन लिया है। वहीं, राखी बाकुलतला थाना क्षेत्र की हैं। उन्होंने कहा, हम बालिग हैं, अपने जीवन का फैसला खुद कर सकते हैं। जब कोई जीवन साथी चुनता है, तो लिंग क्यों मायने रखे? रिया ने बताया कि बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था और उनकी परवरिश उनकी मौसी कविता कोयल ने की। शुरुआत में मौसी हैरान थीं, लेकिन उन्होंने इस रिश्ते का विरोध नहीं किया। रिया ने हाई स्कूल तक पढ़ाई की है और एक नर्तकी के रूप में काम करती हैं। वहीं, राखी ने नौवीं तक पढ़ाई की और एक स्थानीय डांस ग्रुप में काम करती हैं। उन्होंने कहा, परिवार के दबाव के बावजूद मैंने उसी से शादी करने का फैसला लिया जिससे मैं सच्चा प्रेम करती हूं।
सोशल मीडिया पर हुई थी दोनों की मुलाकात
दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई थी। दोनों फोन पर लंबी बातें करतीं और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। बाद में वे एक ही डांस ग्रुप में शामिल हुईं। गांव के लोग भी उनके साथ खड़े हुए।
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गांववालों ने इस विवाह को लेकर क्या कहा?
एक स्थानीय निवासी मिलन सरदार ने कहा, हम सबने मिलकर अपनी इन दो बेटियों की नई जिंदगी शुरू करने में मदद की। सभी ने योगदान दिया। रस्मों के बाद चिकन और चावल का भोज हुआ, जैसे किसी और शादी में होता है। मंदिर में पहली बार दो युवतियों की शादी देखकर कुछ लोग हैरान थे। जबकि कुछ ने इसे साहस और प्रेम का उत्सव माना। क्षेत्र में स्वास्थ्य और स्वच्छता कार्य से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अंकुर बसु ने कहा, यह किसी विरोध का प्रतीक नहीं था, बल्कि दो लोगों का एक-दूसरे को चुनने का फैसला था।
पुलिस ने कहा कि इस घटना के खिलाफ किसी ने कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। एक अधिकारी ने बताया, अगर ग्रामीण शांति से मंदिर में समारोह करते हैं, तो पुलिस का कोई दखल नहीं होता।