बेलारूस 2024 तक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का पूर्ण सदस्य बनने के लिए तैयार है। वहीं बेलारूस का कहना है कि अब फैसला सदस्य देशों से संगठन के भीतर सहयोग पर निर्भर है। बेलारूस और भारत के शुरुआत से ही मधुर रिश्ते रहे है और पूर्ण रूप से बेलारूस को राष्ट्र की मान्यता देना वाला भारत पहला देश रहा था।
भारत में बेलारूसी दूत आंद्रेई रजेउस्की ने जोर देकर कहा कि संगठन शक्तिशाली और आशाजनक है। उन्होंने कहा कि भारत ने चार जुलाई को इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। हमारे राष्ट्रपति ने भी इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया और शिखर सम्मेलन के दौरान, सभी सदस्य देशों द्वारा प्रतिबद्धता के एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
आगे उन्होंने कहा कि हम अपनी संसद में उन सभी संधियों को अपनाने की प्रक्रिया में हैं जो एससीओ का पूर्ण सदस्य बनने के लिए आवश्यक हैं। जैसा कि हमारे राष्ट्रपति ने कहा, हम शीघ्र ही एससीओ का सदस्य बनने की उम्मीद करते हैं।
साथ ही आंद्रेई रजेउस्की बताया कि जैसा कि हमारे राष्ट्रपति ने उल्लेख किया है कि हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द, हम इस संगठन के पूर्ण सदस्य बन जाएंगे क्योंकि हम इस संगठन में एक बड़े सहयोग पर भरोसा करते हैं और हमारे पास कुछ दृष्टिकोण है कि इस संगठन को कैसे विकसित किया जाए।
इससे पहले जुलाई में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की थी जहां उन्होंने कहा था कि ईरान संगठन के नए सदस्य के रूप में शामिल होने जा रहा है। उन्होंने बेलारूस की एससीओ सदस्यता के लिए दायित्व पत्र पर हस्ताक्षर करने का भी स्वागत किया।
बेलारूस-भारत के बीच सीधी उड़ान सेवा इस हफ्ते शुरू होगी
भारत में बेलारूस के राजदूत आंद्रेई रजेउस्की ने बुधवार को कहा कि बेलारूस की राजधानी मिन्स्क और भारत की दिल्ली के बीच पहली सीधी उड़ान 12 अगस्त से शुरू होगी। एएनआई से बात करते हुए राजदूत ने कहा कि बेलारूस और भारत के बीच नियमित उड़ान सेवा शुरू करने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। आगे बताया कि यह आसान रास्ता नहीं था। पिछले कुछ वर्षों से, हमने इस परियोजना को पूरा करने के लिए अपना नियमित काम किया है और अब मैं गर्व से घोषणा कर रहा हूं कि इस सप्ताह के अंत में (शनिवार को) पहली निर्धारित उड़ान होगी मिन्स्क से भारत तक की यात्रा होगी।