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ताजपोशी से पहले राहुल गांधी की उम्मीदों को लगा एग्जिट पोल का झटका

Fri, 15 Dec 2017 10:34 AM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली 
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राहुल गांधी - फोटो : Self
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कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी से पहले एग्जिट पोल के नतीजों ने उनके उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। विभिन्न एग्जिट पोल नतीजे बता रहे हैं कि  गुजरात का अपना गढ़ बचाने में भाजपा कामयाब रही है। इसके साथ उसने कांग्रेस से हिमाचल का ताज छीन लिया है। एग्जिट पोल गुजरात और हिमाचल दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार बनवा रहे हैं। वह भी ऐसे समय में जब नई पौध के रूप में राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी की कमान संभालने जा रहे हैं। अध्यक्ष पद पर उनकी ताजपोशी से ठीक दो दिन पहले गुजरात और हिमाचल के लिये आये एग्जिट पोल के नतीजों ने राहुल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेशक चुनाव के वास्तविक नतीजे अलग हों मगर राहुल को एक हारे हुए योद्धा के रूप में ताज पहनना पड़ेगा। जिससे उन्हें कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल को उठाने में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। राहुल की उम्मीदों पर पानी इसलिये भी फिरता दिख रहा है कि वे गुजरात में भाजपा को चुनौती देकर उसपर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करना चाहते थे। ताकि 2019 में वे पीएम मोदी के सामने विकल्प बन सकें। मगर यहां एग्जिट पोल के नतीजों ने राहुल के उम्मीदों पर न सिर्फ पानी फेरा है बल्कि उनके अभियान की हवा निकाल दी है। 
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एग्जिट पोल ने गुजरात के साथ हिमाचल में बनाई भाजपा की सरकार
गुजरात चुनाव समाप्त होते ही आए एग्जिट पोल के नतीजों ने सूबे में भाजपा की वापसी करार दी है। तो हिमाचल चुनाव के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में जाते दिखे। वैसे हिमाचल में कांग्रेस के हार की उम्मीद सभी लोगों को थी। यहां पारंपरिक बदलाव के तहत इस दफे जीत की बारी भाजपा की थी। इसे ध्यान में रखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने भी ज्यादा दम नहीं लगाया था। पूरा चुनाव मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अकेले लड़ते नजर आए। रश्म अदायगी के तौर पर राहुल ने महज एक दिन ही चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उनका सारा जोर गुजरात चुनाव में लगा हुआ था। मगर एग्जिट पोल ने गुजरात में भी राहुल के दावों की हवा निकाल दी है। पाटीदार आंदोलन, बेरोजगारी, किसानों का गुस्सा, ऊना में हुई दलितों पर अत्याचार की घटना और पीएम मोदी की राज्य में गैर मौजूदगी के बावजूद भी सूबे में भाजपा जीत की ओर अग्रसर दिखाई दे रही है। शायद कांग्रेस पार्टी जनता की विश्वास जीतने में सफल नहीं रही।  कांग्रेस को नकारते हुए गुजरात की जनता ने एकबार दोबारा से भाजपा में ही अपना भरोसा कायम रखा है। ऐसी परिस्थिति राहुल गांधी की ताजपोशी से दो दिन पहले बनेगी यह कांग्रेस रणनीतिकारों ने सपनों में भी नहीं सोचा था। लेकिन हालात ऐसे हैं कि राहुल कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। इसलिए वे अपना कदम पीछे भी नहीं खींच सकते हैं। 

16 दिसम्बर को है राहुल की ताजपोशी और 18 को आने हैं परिणाम 
कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी 16 दिसम्बर को होनी है। इससे ठीक दो दिन पहले आये एग्जिट पोल के नतीजों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी गुजरात के चुनाव में असरदार नजर नहीं आये। जमीन पर उनकी कवायदें नजर भी आ रही थीं। मगर गुजरात की जनता के मन में शायद वे यह विश्वास दिलाने में कामयाब नजर नहीं आये की वे भाजपा से बेहतर शासन देंगे। कांग्रेस की मुश्किल यह है कि वह शासन का नैरेटिव नहीं तय कर पा रही है कि सत्ता में आने के बाद वह क्या करेगी। जबकि यूपीए के कुशासन का बोझ पहले से ही कांग्रेस पर भारी है। गुजरात में हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश के जरिये कांग्रेस बेशक विकल्प बनने की कोशिश में थी।
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मगर राज्य की जनता में एक खास बात का भय नजर आया कि भाजपा का शासन जाने के बाद एक खास वर्ग का अत्याचार बढ़ जाएगा। कई लोग 1995 से पहले के युग की कल्पना जताने लगे। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी यह विश्वास दिलाने में कामयाब नजर नहीं आ रही थी कि वह भाजपा को चुनाव में हरा सकती है। उसको वोट देने की बात करने वाले वोटर भी यह बात करते नजर आ रहे थे कि सरकार तो सूबे में भाजपा की ही बनेगी।
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गुजरात और हिमाचल में भाजपा ने लगाया था दम

राहुल गांधी
इसके अलावा हार्दिक पटेल पर कांग्रेस का निर्भर होना भी उसके लिए घातक नजर आ रहा है। शायद पटेलों के भाजपा विरोध को देख बाकी अन्य जातियां भाजपा के पाले में आ गई। भाजपा की रणनीति भी पाटीदारओं की नाराजगी के खामियाजे की पूर्ति के लिए इसी के इर्दगिर्द थी। वे गैर पाटीदार बिरादरी पर केंद्रित थे। हालांकि भाजपा ने नाराजगी झलकने के बाद भी पाटीदारों पर प्रयास नहीं छोड़ा था। अपने परम्परागत पाटीदार मतों का साथ लेने के लिए भाजपा ने 52 पटेल बिरादरी के नेताओं को  टिकट देकर उम्मीदवार बनाया था। जीएसटी और नोटबंदी के विरोध को भी भाजपा थामने में कामयाब रही है।

ऐन चुनाव के वक्त पर केंद्र सरकार ने जीएसटी नियमों को न सिर्फ उदार बनाया बल्कि कई रियायतें भी प्रदान की। इसके अलावा भी पीएम मोदी ने जनता को विश्वास दिलाया कि जरूरत पड़ने पर वे और भी बदलाव कर सकते हैं । जबकि नोटबंदी को वे काले धन के खिलाफ कवायद करार देने में सफल रहे हैं। वैसे गुजरात जीत के लिए अमित शाह ने कारगर रणनीति बना रखी थी। जमीन पर केंद्र सरकार के तमाम मंत्रियों को करीब दो माह से उतार रखा था। तो टिकट बंटवारे में भी जीत को प्राथमिकता दी गई। राज्यसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस के स्थापित विधायकों को तोड़कर उन्हें चुनाव में उम्मीदवार बनाने का फैसला भी कारगर नजर आ रहा है। 

हिमाचल में परंपरागत बदलाव के बावजूद भाजपा ने लगाया दम 
भाजपा और कांग्रेस में फर्क यह है कि हिमाचल में परंपरागत बदलाव के क्रम के बावजूद भाजपा ने चुनाव में अपना पूरा दम लगाया था। बीच चुनाव में प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के साथ पीएम मोदी ने इस छोटे से राज्य में भी 7 चुनावी सभाओं को सम्बोधित किया। इसके अलावा अमित शाह ने भी कई चुनावी सभाएं की। जबकि कई केंद्रीय मंत्री यहां भी प्रचार में जुटे हुए थे। बावजूद उसके भाजपा ने शांता कुमार को साधे रखा और जेपी नड्डा को भी नाराज होने का मौका नहीं दिया। पीएम मोदी और धूमल के चेहरे के अलावा यहां वीरभद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी भी भाजपा के जीत की वजह मानी जा रही है। गुड़िया कांड चुनाव में छाया रहा। 

क्या हैं एग्जिट पोल के नतीजे
गुजरात के लिए एग्जिट पोल के सभी नतीजों ने करीब भाजपा की जीत बताई है। एबीपी-सीएसडीएस के सर्वे ने बीजेपी को गुजरात में 117, कांग्रेस को 64 और अन्य को एक सीट पर जीतते दिखाया है। इंडिया टुडे के एग्जिट नतीजों ने भी भाजपा को 99 से 113, चाणक्या ने भाजपा को 135 और कांग्रेस को 47, टाइम्स नाउ ने भाजपा-109 और कांग्रेस को 70 सीट का अनुमान जताया है। हिमाचल में एबीपी-सीएसडीएस ने भाजपा को 38 सीट मिलते हुए दिखाया है। जबकि सरकार के लिए महज 35 सीटों की दरकार है। यानी हिमाचल में भी भाजपा की सरकार बनेगी।
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