कथित बीफ पार्टी मामले में केंद्रीय हिंदी संस्थान (केएचएस) पर इस मामले की लीपापोती के आरोप शुरू से लग रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि पार्टी का हल्ला होने के बाद जांच को पहुंचे पुलिस व प्रशासन की संयुक्त टीम को भी गुमराह किया गया। उन्हें फोटो में दिखाई गई जगह के बदले हास्टल का कोई और हिस्सा दिखाया गया। यही नहीं 18 मार्च को पार्टी के फोटो वायरल होने से एक दिन पहले ही इस संबंध में मिली शिकायत पर संस्थान ने कोई संज्ञान ही नहीं लिया।
सूत्र बताते हैं कि निरीक्षण को पहुंची पुलिस-प्रशासन टीम को जहां मांस काटने के फोटो दिखाए गए हैं, उसे छोड़ इस ब्लाक के अन्य हिस्से का निरीक्षण कराया गया। संस्थान निदेशक प्रो. एनके पांडे का कहना है कि फोटो मिले थे, उस वक्त वह इलाहाबाद में थे। अधीनस्थों ने उन्हें बताया कि ऐसी कोई गतिविधि नहीं मिली। प्रो. पांडे का यह भी कहना है कि फोटो में दिख रहे ‘बी’ ‘फी’ जिसे बीफ बोलकर प्रचारित किया जा रहा है, वह बाईफाई लिखा हुआ है।
टूटी-फूटी हिंदी में छात्रों ने ये लिखा है। विदेशी छात्र मांसाहारी होते हैं। छात्रों ने जो खाया है वह बीफ है इसकी पुष्टि कैसे होगी। शहर में कहीं बीफ बेचा जाता है, इसकी जानकारी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा संस्थान की प्राथमिकता है। किसी छात्र के साथ कोई अनहोनी हुई तो विदेशों में शहर और देश की छवि खराब होगी। उनके देशों में भी भारतीय छात्र पढ़ते हैं।
यही नहीं, हॉस्टल में मांस पकाए जाने की शिकायत संस्थान को 17 मार्च को ही मिल गई थी। शिकायतकर्ता ने फेसबुक के जरिये फोटो भेजने के साथ ही ऐसी गतिविधियां बंद कराने का आग्रह भी किया था। किंतु संस्थान ने जांच करने की जरूरत नहीं समझी और न ही फोटो में दिख रहे छात्रों से पूछताछ हुई। फोटो वायरल होने के बाद भी मामले को दबाने के ही प्रयास हुए।