आज भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिवस है। आजादी से पहले पाकिस्तान के कराची में जन्मे आडवाणी ने राजनीति में लंबा संघर्ष कर एक बड़ा मुकाम हासिल किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ इनकी जोड़ी राम लक्ष्मण की मानी जाती थी। जानिए उनके बारे में कुछ खास बातें।
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लाल कृष्ण अाडवाणी का असली नाम लाल किशनचंद आडवाणी है। उनकी शुरूआती पढ़ाई लिखाई कराची और फिर लाहौर से हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई के गर्वनमेंट लॉ कालेज में एडमिशन लिया। जहां से कानून में स्नातक किया।
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आज भाजपा जिस मुकाम पर उसे वहां तक पहुंचाने का बहुत बड़ा श्रेय लाल कृष्ण आडवाणी को भी जाता है। जिन्होंने भाजपा को दो सांसदों से डेढ़ सौ सांसदों वाली पार्टी तक पहुंचाया।
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आडवाणी ने पढ़ाई के दौर में ही आरएसएस का दामन थाम लिया था। उन्हें 1947 में कराची में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में सचिव बनाया गया।
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साल 1951 में जब डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की तो आडवाणी शुरूआती सदस्यों में थे। 1957 तक वह इसके सचिव रहे। जनसंघ में कई पदों पर अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं देने के बाद आडवाणी 1972 में इसके अध्यक्ष चुने गए।
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बाद में पार्टी जनसंघ से भाजपा में बदली तो वर्ष 1980 में पार्टी की स्थापना के बाद से 1986 तक लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद 1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व भी संभाला।
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यही वह दौर था जब लालकृष्ण आडवाणी ने देशभर में भाजपा को बढ़ाने का काम किया। उनकी रथयात्राओं ने लोगों में हिंदुत्व का ज्वार भर दिया।
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90 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की जोड़ी भारतीय राजनीति के केंद्र में रही। मंदिर आंदोलन चरम पर था और आडवाणी इसके नायक।
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उनकी एक के बाद एक निकाली गई कई यात्राओं का ही परिणाम रहा कि भारतीय जनता पार्टी ने बहुत कम समय में लोगों के दिलों में जगह बनाई और पार्टी कई राज्यों में सत्ता में आ गई।
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मंदिर आंदोलन से ऊर्जा पाकर आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की जोड़ी ने 1996 के लोकसभा चुनाव में वो चमत्कार भी कर दिया जिसने अलग इतिहास कायम किया।
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भाजपा ने पहली बार 1996 में केंद्र में अपनी सरकार बनाई। वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और उनके सिपहसलार आडवाणी गृहमंत्री।
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हालांकि कहा ये भी जाता है कि मंदिर आंदोलन के बाद जब आडवाणी की लोकप्रियता शिखर पर थी तब उन्हें ही भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर देखा जाता था। लेकिन लोकसभा चुनावों से पूर्व मुंबई के अधिवेशन में आडवाणी ने खुद अटल बिहारी वाजपेयी का नाम आगे कर उन्हें प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर प्रोजक्ट किया।
आडवाणी अभी तक आधा दर्जन से ज्यादा रथ यात्राएं निकाल चुके हैं। जिनमें 'राम रथ यात्रा', 'जनादेश यात्रा', 'स्वर्ण जयंती रथ यात्रा', 'भारत उदय यात्रा' और 'भारत सुरक्षा यात्रा' 'जनचेतना यात्रा' प्रमुख हैं।