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Rajeev Shukla: BCCI पर भाजपा हावी हो या फिर कांग्रेस, कैसे हर दौर में अहम बने रहते हैं राजीव शुक्ला?

Tue, 18 Oct 2022 05:49 PM IST
जयदेव सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कौन हैं राजीव शुक्ला जो 22 साल से BCCI में जमे हुए हैं? जिस कमेटी में भाजपा का दबदबा है उसमें कैसे कांग्रेस नेता होते हुए भी बन हुए हैं? BCCI की नई कमेटी के अन्य सदस्य कौन हैं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है? कितने सदस्य पूर्व क्रिकेटर हैं? आइये जानते हैं…
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राजीव शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला BCCI के उपाध्यक्ष चुन लिए गए हैं। पिछले 22 साल से क्रिकेट प्रशासक के तौर पर सक्रिय शुक्ला नई कमेटी में इकलौते सदस्य हैं जो कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। शुक्ला के अलावा कमेटी के ज्यादातर सदस्य भाजपा से जुड़े हैं।

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आखिर कौन हैं राजीव शुक्ला जो 22 साल से BCCI में जमे हुए हैं? जिस कमेटी में भाजपा का दबदबा है उसमें कैसे कांग्रेस नेता होते हुए भी बने हुए हैं? BCCI की नई कमेटी के अन्य सदस्य कौन हैं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है? कितने सदस्य पूर्व क्रिकेटर हैं? आइये जानते हैं…

कौन हैं राजीव शुक्ला? 
63 साल के राजीव शुक्ला ने 1978 में अपने शहर कानपुर में पत्रकार के रूप में काम शुरू किया। वह रविवार पत्रिका में वीपी सिंह से जुड़े जमीन के सौदों पर लिखी अपनी खबरों से चर्चा में आए। इसी दौरान राजीव शुक्ला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीब आए। तब से जुड़ा गांधी परिवार से उनका रिश्ता आज भी कायम है। कहा जाता है कि 10 जनपथ में उनकी बेरोकटोक आवाजाही है। 
राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की बहन हैं। पत्नी के साथ मिलकर राजीव शुक्ला ने एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया। न्यूज और एंटरटेनमेंट चैनल चलाने वाले बीएजी फिल्म्स की अब अनुराधा ही मालकिन हैं। राजीव मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे। हाल ही में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा है।    

राजीव शुक्ला हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी भी हैं। जहां नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। - फोटो : अमर उजाला

 BCCI में कैसा रहा है राजीव शुक्ला का सफर?
अप्रैल 2000 में राजीव शुक्ला पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए। यही वह दौर था जब उन्होंने क्रिकेट प्रशासन में भी अपना दखल शुरू किया और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) में उनकी एंट्री हुई। UPCA के प्रतिनिधि के तौर पर शुक्ला BCCI की बैठकों में जाने लगे। इन्हीं बैठकों में शामिल होने के दौरान उन्होंने BCCI में पैठ बनानी शुरू कर दी। 2005 में जब शरद पवार BCCI प्रमुख बने तो शुक्ला BCCI के अनाधिकृत प्रवक्ता के तौर पर हर मंच पर BCCI का पक्ष रखने लगे। ये वो दौर था जब टीवी का तेजी से प्रसार हो रहा था। शुक्ला को मीडिया में काम करने का लाभ मिला। 

कांग्रेस का सांसद होने की वजह से शुक्ला की दिल्ली में अच्छी पकड़ थी। शुक्ला BCCI और सरकार के बीच एक कड़ी की तरह काम करने लगे। कांग्रेस ही नहीं भाजपा में भी शुक्ला के कई नेताओं से अच्छे रिश्ते हैं। अरुण जेटली से उनके बेहद करीबी संबंध थे। इस वजह से केंद्र में जब भाजपा सत्ता में रही तब भी शुक्ला BCCI के संकटमोचक बने रहे। कहा जाता है कि गांधी परिवार से लेकर मनमोहन सिंह हो या नरेंद्र मोदी सभी से शुक्ला हर दिन मिल सकते हैं। यहां तक कहा जाता है कि BCCI के जो पदाधिकारी उन्हें पसंद नहीं करते, उन्हें भी सरकार से जुड़े मामलों में राजीव शुक्ला के विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
राजनेता हों या बिजनेसमैन या फिर क्रिकेटर सभी से राजीव शुक्ला के अच्छे संबंध हैं। इसी वजह से शुक्ला कई बार कह चुके हैं कि मेरे लिए दोस्तों से ज्यादा आसान दुश्मनों को गिनना है। क्योंकि मेरे दुश्मन बहुत कम हैं। अपनी इन्हीं खूबियों के चलते राजीव शुक्ला बीते करीब दो दशक से BCCI में जमे हुए हैं। चाहे शरद पवार रहे हों या जगमोहन डालमिया या शशांक मनोहर या एन श्रीनिवासन या फिर अनुराग ठाकुर सभी के दौर में शुक्ला बने रहे और सभी के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाते रहे।  

बीसीसीआई एजीएम मुंबई में हुई। - फोटो : सोशल मीडिया

BCCI की नई कमेटी के अन्य सदस्य कौन हैं? 
BCCI की सालाना बैठक में रोजर बिन्नी को अध्यक्ष चुना गया। उनके साथ राजीव शुक्ला उपाध्यक्ष, गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव, भाजपा नेता आशीष शेलार कोषाध्यक्ष और असम के एडवोकेट जनरल देवाजीत सैकिया संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। इसके साथ ही खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के भाई अरुण धूमल और पूर्व BCCI प्रमुख जगमोहन डालमिया के बेटे अभिषेक डालमिया को IPL का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है।   

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रोजर बिन्नी - फोटो : अमर उजाला
नई कमेटी में कितने सदस्य पूर्व क्रिकेटर हैं?
नई कमेटी में रोजर बिन्नी अकेले ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का अनुभव है। उनके अलावा संयुक्त सचिव देवाजीत सैकिया भी पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं। सैकिया के पास प्रथम श्रेणी क्रिकेट का अनुभव है। इसके साथ ही वह असम क्रिकेट एसोसिएशन में भी सक्रिय हैं।
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