केरल के सबरीमाला मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अच्छी खबर है। अब वह विमानों के केबिन बैगेज में नारियल ले जा सकेंगे। हालांकि, तीर्थ यात्रियों को यह अनुमति सीमित समय के लिए दी गई है। नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने शनिवार को कहा कि तीर्थयात्रियों को 20 जनवरी, 2025 तक विमानों के केबिन बैगेज में नारियल ले जाने की अनुमति दी जाएगी।
बता दें कि सबरीमाला तीर्थयात्रा सीजन नवंबर के मध्य में शुरू होगा। यह सीजन करीब दो महीने तक चलेगा। अभी तक तीर्थयात्रियों को फ्लाइटों में नारियल ले जाने की अनुमति नहीं थी, क्योंकि इसे ज्वलनशील माना जाता है। हालांकि, अब नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) ने तीर्थयात्रियों को सीमित अवधि के लिए अनुमति दे दी है।
नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू ने शनिवार को कहा कि सबरीमाला तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को आसान बनाने के लिए, मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा अवधि के दौरान केबिन बैगेज के रूप में 'इरुमुडी' में नारियल ले जाने की छूट दी गई है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, सभी आवश्यक सुरक्षा जांच के साथ यह आदेश 20 जनवरी, 2025 तक प्रभावी रहेगा।
जनवरी के अंत तक चलेगा तीर्थयात्रा सीजन
अपेक्षित एक्स-रे, ईटीडी (एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर) और शारीरिक जांच के बाद ही नारियल को केबिन में ले जाने की अनुमति दी जाएगी। बरीमाला में भगवान अयप्पा मंदिर नवंबर के मध्य में दो महीने लंबे तीर्थयात्रा सीजन के लिए खुलेगा और तीर्थयात्रा सीजन जनवरी के अंत तक चलेगा।
केट्टुनिराकल अनुष्ठान के लिए तैयार करते हैं इरुमुडी केट्टू
हर साल लाखों श्रद्धालु पहाड़ी मंदिर में आते हैं और उनमें से अधिकांश 'इरुमुडी केट्टू' (भगवान के लिए घी से भरे नारियल सहित प्रसाद से भरा पवित्र थैला) ले जाते हैं। आम तौर पर, सबरीमाला की तीर्थयात्रा करने वाले लोग 'केट्टुनिराकल' अनुष्ठान के हिस्से के रूप में 'इरुमुडी केट्टू' तैयार करते हैं और पैक करते हैं।
इरुमुडी केट्टू रखने वाले ही गर्भगृह तक पहुंच सकते हैं
अनुष्ठान के दौरान, नारियल के अंदर घी भरा जाता है, जिसे बाद में अन्य प्रसाद के साथ बैग में रखा जाता है। बैग में तीर्थयात्रा के दौरान विभिन्न पवित्र स्थानों पर तोड़ने के लिए कुछ सामान्य नारियल भी होंगे। केवल उन्हीं तीर्थयात्रियों को मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़ने की अनुमति है जो अपने सिर पर 'इरुमुडी केट्टू' रखते हैं। इसे नहीं ले जाने वालों को गर्भगृह तक पहुंचने के लिए अलग रास्ते से जाना पड़ता है।
संबंधित वीडियो