देश के विभिन्न हिस्सों से ताल्लुक रखने वाले करीब डेढ़ लाख युवा, जिन्होंने सेना में भर्ती होकर 'नाम-नमक-निशान' के जज्बे को साकार करने का सार्थक प्रयास किया था, अब उनकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंचेगी। अभी तक इन युवाओं की यह लड़ाई, सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जा रही है। केंद्र सरकार की तरफ से इन अभ्यर्थियों को किसी भी तरह का आश्वासन नहीं मिला है।
कांग्रेस पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी के मुताबिक, 'युवा न्याय' की कानूनी लड़ाई प्रारंभ होने जा रही है। अग्निपथ योजना की वजह से सेना की पेंडिंग भर्तियों में चयनित 1.5 लाख युवाओं के हक व न्याय की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाएगी। सेना भर्ती के अभ्यर्थियों ने रोहित चौधरी के साथ पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद से बातचीत की है। चौधरी ने बताया, इन युवाओं के साथ न्याय होगा। वे सेना में भर्ती होने की लड़ाई अवश्य जीतेंगे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 'अग्निपथ' योजना लाकर लाखों युवाओं के सपनों को रौंद दिया है। डेढ़ लाख से अधिक युवाओं को 'अग्निपथ' योजना लागू होने से पहले तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए चयनित किया गया था, लेकिन आज तक उन्हें ज्वाइनिंग लैटर नहीं मिला है। इनमें एयरफोर्स के 7000 युवा और नर्सिंग असिस्टेंस आर्मी (मेडिकल कोर) के लगभग 2,500 नर्सिंग असिस्टेंट भी शामिल हैं। इनकी भर्ती की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। 2019 से 2021 के बीच आर्मी में हुई लगभग 97 भर्तियों को भी 'अग्निपथ' योजना की आड़ में रद्द कर दिया गया। कांग्रेस पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी बताते हैं, इसमें इन अभ्यर्थियों का क्या कसूर था। इन युवाओं ने सेना में भर्ती होने के लिए अथक मेहनत की थी।
उपराष्ट्रपति आवास के बाहर प्रदर्शन
बतौर रोहित चौधरी, कड़ी मेहनत के बावजूद इन युवाओं को सेना की वर्दी नहीं मिल सकी। इन युवाओं ने सेना भर्ती के दो पड़ाव भी पार कर लिए थे। केंद्र सरकार ने उसी वक्त 'अग्निपथ' योजना लागू कर दी। नतीजा, नियुक्ति पत्र लेने का इंतजार कर रहे डेढ़ लाख युवाओं के सपने चूर हो गए। तब से लेकर अब तक वे युवा, सड़कों की खाक छान रहे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर इन युवाओं ने अपने हक के लिए हुंकार भरी है।
पिछले दिनों में युवाओं ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के आवास के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन किया था। युवाओं के प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा था। उन्हें समय नहीं मिला तो अभ्यर्थियों ने मजबूर होकर उपराष्ट्रपति आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वह प्रदर्शन बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से किया गया। जिस वक्त उपराष्ट्रपति का काफिला गुजर रहा था, युवाओं ने लाइन पार करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने दूर खड़े होकर प्रदर्शन किया।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा व श्रीनिवासन भी पहुंचे थे
गत दिनों जंतर मंतर पर एकत्रित हुए हजारों अभ्यर्थियों को अपना समर्थन देने के लिए राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवासन बीवी भी पहुंचे थे। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, सरकार को बिना किसी देरी के इन युवाओं को नियुक्ति पत्र देना चाहिए। अग्निपथ योजना आने से पहले इन युवाओं का आर्मी व वायुसेना में निकली भर्तियों में चयन हो चुका था। इन्हें सिर्फ नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार था। सेना भर्ती में चयनित होने के बावजूद, डेढ़ लाख से ज्यादा युवा मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण आज बेरोजगार हैं। देश सेवा का जुनून पाले ये युवा दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। अग्निपथ योजना की आड़ में सेना में चयनित डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया गया। इन युवाओं को ज्वॉइनिंग नहीं जा रही।
गत वर्ष अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी से की थी मुलाकात
गत वर्ष कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन युवाओं से मुलाकात की थी। तब राहुल ने कहा था कि सरकार ने 'अग्निपथ' योजना की आड़ में सेना एवं वायुसेना में स्थायी भर्ती के लिए संचालित प्रक्रिया को रद्द कर, इन युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया। अनेक युवा, 'सत्याग्रह की भूमि' चम्पारण से पैदल चलकर दिल्ली पहुंचे थे।
राहुल गांधी ने इन युवाओं से मिलने के बाद एक्स पर लिखा था, 'अस्थायी भर्ती के लिए लाई गई अग्निवीर योजना (अग्निपथ) की आड़ में 2019-21 तक चली सेना एवं वायुसेना की 'स्थायी भर्ती प्रक्रिया' को रद्द कर सरकार ने अनगिनत परिश्रमी एवं स्वप्नदर्शी युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया।
राहुल ने लिखा, 'दुखद है कि 'सत्याग्रह की भूमि' चम्पारण से लगभग 1100 किलोमीटर पैदल चल कर अपना हक मांगने दिल्ली आए इन नौजवानों के संघर्ष को मीडिया के किसी भी कैमरे में जगह नहीं मिली। 'छोटे-छोटे कमरों में रहकर बड़े बड़े लक्ष्यों को साधने वाले इन महत्वाकांक्षी छात्रों की पीड़ा शायद मुख्यधारा के मीडिया के 'प्राइम टाइम' में जगह न बना सके। हम सिर्फ 'रोजगार की बात' कर रहे इन युवाओं के संघर्ष में सड़क से लेकर संसद तक उनके साथ हैं।