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सड़क से थाने तक TMC में लड़ाई: पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर छिड़ी जंग, ममता खेमा शिकायत लेकर थाने पहुंचा

Sun, 28 Jun 2026 10:36 AM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता

सार

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC गुट ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार कोलकाता के पूर्व पार्षदों के साथ बैठक कर नगर निकाय चुनावों की तैयारी शुरू कर दी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले 'कालीघाट विंग' ने बागियों पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
 
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ऋतब्रत बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC गुट ने कोलकाता के पूर्व पार्षदों से फिर मुलाकात की, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, पार्टी के 'कालीघाट विंग' ने इस कदम का जवाब देते हुए बागियों के खिलाफ 'धोखाधड़ी और गलत पहचान बताने' के आरोप में पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं।

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दूसरी बैठक में जुटे 47 पूर्व पार्षद
सूत्रों के अनुसार, शनिवार को पूर्वी कोलकाता के टोपसिया स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में हुई बैठक में कोलकाता नगर निगम (KMC) के 47 पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य विधानसभा चुनाव में हार के बाद शहर में पार्टी के समर्थन आधार को मजबूत करना और इस वर्ष के अंत में संभावित नगर निकाय चुनावों की रणनीति तैयार करना था। यह एक सप्ताह के भीतर बागी गुट की पूर्व पार्षदों के साथ दूसरी बैठक थी। इससे पहले 22 जून को न्यू टाउन के एक फाइव-स्टार होटल में भी इसी तरह की बैठक आयोजित की गई थी।

बैनरों से गायब रहीं ममता बनर्जी की तस्वीरें
दोनों बैठकों में लगाए गए बैनर और साइनबोर्ड पर TMC का 'घास और दो फूल' वाला चुनाव चिह्न और 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम तो मौजूद था, लेकिन पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की तस्वीर कहीं दिखाई नहीं दी।
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कालीघाट विंग ने दर्ज कराईं शिकायतें
इस बीच, ममता बनर्जी की करीबी और TMC की संयुक्त राष्ट्रीय सचिव डोला सेन ने न्यू टाउन और प्रगति मैदान पुलिस थानों में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी गुट ने दोनों बैठकों में पार्टी के चुनाव चिह्न के साथ छेड़छाड़ की, 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम का अनुचित इस्तेमाल किया और लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि बागी गुट ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रसारित किए तथा बिना अनुमति बैठकें आयोजित कीं।

'हम ही असली TMC'
बागी TMC विधायक और विधानसभा में पार्टी के उपनेता संदीपन साहा ने कहा, 'हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है और हम राज्य विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल हैं। हमारी वैधता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। हमने अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर लिया है और जल्द ही अपने राजनीतिक कार्यक्रमों की घोषणा करेंगे।' शनिवार की बैठक में विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा—दोनों मौजूद रहे। दोनों नेताओं को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC से निष्कासित किया जा चुका है। उनकी मौजूदगी से बागी गुट पर उनकी मजबूत पकड़ का संकेत मिला।

KMC भंग होने के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल
पश्चिम बंगाल सरकार ने 8 जून को कोलकाता नगर निगम (KMC) के बोर्ड को भंग कर दिया था। मेयर फरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद सभी निर्वाचित पार्षदों, चेयरपर्सनों और मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों को पद छोड़ना पड़ा और निगम की कार्यकारी शक्तियां एक प्रशासक को सौंप दी गईं। हकीम, जिन्हें पहले ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था और जिनके बागी खेमे में जाने की चर्चा है, शनिवार की बैठक में शामिल नहीं हुए।

नगर निकाय चुनाव की रणनीति पर मंथन
सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य फोकस आगामी KMC चुनावों के लिए रोडमैप तैयार करना था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि शहर के वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिसंबर के आसपास नगर निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं। बैठक में उन पार्षदों और कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता और अन्य सहयोग उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई, जिन्हें राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद गिरफ्तार किया गया है।

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महुआ मोइत्रा का पलटवार
वहीं, इन बैठकों पर ममता बनर्जी के प्रति वफादार TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'बागी विधायक राजनीतिक संघर्ष से अधिक कानूनी और संगठनात्मक विवादों में उलझे हुए हैं। ममता बनर्जी ने स्वयं TMC का चुनाव चिह्न बनाया था और पार्टी को मिलने वाला जनसमर्थन किसी व्यक्ति विशेष के बजाय उनके नेतृत्व पर आधारित है। जनता जिस चुनाव चिह्न का समर्थन ममता बनर्जी करेंगी, उसी का समर्थन करेगी।' हाल की घटनाओं के बावजूद ममता बनर्जी के पक्ष में 2.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं का जनादेश कायम है। कुछ पार्षदों, विधायकों या सांसदों के पार्टी छोड़ने से न तो पार्टी के जनादेश पर असर पड़ेगा और न ही उसके जनाधार पर कोई प्रभाव पड़ेगा।'

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