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इस घटना के बाद तिरंगे को भी सलाम करना छोड़ दिया सिमी नेताओं ने

Tue, 28 Feb 2017 12:53 PM IST
टीम टिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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स्टुडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) आज एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार को सिमी के सरगना सफदर हुसैन नागौरी सहित 11 आतंकियों के देशद्रोह का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। लेकिन जिसने इस संगठन की नींव रखी वो आजकल अमेरिका में है। सिमी पर पाबंदी के बाद संस्थापक अध्यक्ष अहमदउल्ला सिद्दीकी अमेरिका चले गए। वह वहां प्रोफेसर हैं।
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39 साल पहले सिमी की अलीगढ़ में नींव रखी गई थी। आजकल सिमी के यहां दफ्तर पर ताला लगा हुआ है। क्योंकि यहां खुफिया एजेंसियों का पहरा लगा रहता है। एक समय कहा जाता था कि मुस्लिम युवाओं के हक-हकूक की आवाज बुलंद करने और सही राह दिखाने के इरादे से इस संगठन की नीव रखी गई थी। लेकिन ये सगंठन एक दशक में ही रास्ता भटक गया और अस्सी के दशक में ही तमाम कार्यकर्ता उग्रवाद की ओर बढ़ चुके थे।

इनकी राष्ट्रविरोधी काली करतूतें तब सामने आईं, जब अयोध्या में बाबरी ढांचे का विध्वंस हुआ। तब सिमी नेताओं ने तिरंगे तक को सलाम करने से भी इन्कार कर दिया था। कई राज्यों में बम धमाकों में संलिप्तता की पुष्टि के बाद 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। तभी से अलीगढ़ शहर के शमशाद मार्केट में खुला कार्यालय सील है। 
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कैसे बिखर गया सिमी ?

safdar nagori - फोटो : PC: indian express
फिर साल 2016 में भोपाल जेल से सिमी के आतंकियों की फरारी और मुठभेड़ में मारे जाने के बाद यह संगठन सुर्खियों में आया। देश में आपातकाल (1975) के दौरान तमाम छात्र संगठनों पर भी पाबंदी लगी हुई थी। आपातकाल हटा तो छात्रों को लामबंद करने के इरादे से 25 अप्रैल 1977 को मुहम्मद अहमदउल्ला सिद्दीकी ने अलीगढ़ में सिमी की स्थापना की।

शुरुआती सदस्यों में कुछ एएमयू छात्र थे, कुछ पूर्व छात्र। गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले सिद्दीकी तब एएमयू से एमएससी (फिजिक्स) कर रहे थे। वही संस्थापक अध्यक्ष बने। दफ्तर खुला, एएमयू से सटे शमशाद मार्केट के एक कमरे में। सब सिमी सदस्य जमात-ए-इस्लामी से प्रभावित थे।

जमात-ए-इस्लामी को इसका आभास हुआ तो उसके सदस्य किनारा कर गए। नेक इरादे से जुड़े तमाम दूसरे लोग भी सिमी से अलग हो गए। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बम धमाके हुए। आगरा में सिनेमाघर और बस में बम-ब्लास्ट में भी सिमी के हाथ की पुष्टि हुई।

​ केंद्र सरकार ने वर्ष 2002 में आतंकी संगठन घोषित करते हुए सभी गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी। अगस्त 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने फिर प्रतिबंध लगा दिया। 
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