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West Bengal : बांग्लादेशी महिला ने टीएमसी के टिकट पर लड़ा था विधानसभा चुनाव, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश

Sat, 21 May 2022 11:14 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

जन्म से बांग्लादेशी आलो रानी सरकार ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 
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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में एक बांग्लादेशी महिला भी प्रत्याशी थी। इसका खुलासा तब हुआ जब इस प्रत्याशी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपनी हार को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की जांच का आदेश दिया है। 

जन्म से बांग्लादेशी आलो रानी सरकार ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। जब वह भाजपा प्रत्याशी के मुकाबले हार गईं तो उन्होंने चुनावी नतीजों को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने बोनगांव दक्षिण सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था। 

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की बीतों दिनों लगातार सुनवाई की थी। 13 मई को प्रतिवादी भाजपा के स्वप्न मजूमदार के वकील ने हाईकोर्ट से कहा कि यह याचिका खारिज कर दी जाना चाहिए, क्योंकि आलो रानी सरकार एक बांग्लादेशी नागरिक है और भारत में दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं है। मजूमदार 2000 वोटों से चुनाव जीते हैं। याचिकाकर्ता आलो रानी सरकार के पति डॉ. हरेंद्र नाथ सरकार बांग्लादेश के बारीसाल में शेर-ए-बांग्ला मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं।

2 मई 2021 को बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद आलो रानी सरकार ने यह याचिका दायर की है। प्रतिवादी मजूमदार की ओर से याचिकाकर्ता के नाम पर जारी बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र (संख्या 7307645577) की एक प्रति दाखिल की गई। इसमें आलो रानी को बारीसाल जिले की मतदाता के रूप में दिखाया गया है।

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सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आलो रानी की नागरिकता साबित की जाए। इसे लेकर बांग्लादेश के भी विभिन्न विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है। अपने जवाब में आलो रानी के वकील ने कहा कि वह बंगाल के हुगली जिले में 1969 में जन्मी हैं, लेकिन डॉ. हरेंद्र नाथ सरकार से शादी के बाद वह 1980 में बांग्लादेशी बन गईं। इसके बाद वैवाहिक विवाद के बाद आलो रानी ने डॉ. सरकार को छोड़ दिया और वह फिर भारत आ गई थी।

वकील ने यह भी कहा कि 2012 में बांग्लादेश की मतदाता सूची में आलो रानी का नाम गलती से लिखा गया था और 2020 में उन्हें यह पता चला तो ढाका स्थित चुनाव आयोग के सचिवालय से उन्होंने उसे हटाने का आग्रह किया। 

हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जांच के आदेश में आलो रानी सरकार को जन्म से बांग्लादेशी नागरिक माना गया है और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 का हवाला देते हुए मामले में कठोर टिप्पणी की है। 

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