बांग्लादेश में 2024 से जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग को लेकर कोलकाता में प्रदर्शन हुआ। बांग्लादेश के उप उच्चायोग के पास बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संत को उचित सुनवाई के बिना लंबे समय से हिरासत में रखा गया है। उन्होंने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग को लेकर शनिवार को कोलकाता में प्रदर्शन हुआ। विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों के साधु-संतों और कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा के सहयोगी दल नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सदस्य भी इसमें शामिल हुए। प्रदर्शनकारी बांग्लादेश के उप उच्चायोग तक मार्च निकाल रहे थे।
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कैसे हुई पुलिस के साथ झड़प?
कोलकाता के बेकबागान इलाके में बांग्लादेश के उप उच्चायोग के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान उनकी पुलिस से धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। बैरिकेड पार करने की कोशिश नाकाम रहने के बाद प्रदर्शनकारी उप उच्चायोग के बाहर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
क्या मांग कर रहे हैं प्रदर्शनकारी?
प्रदर्शनकारियों ने चिन्मय कृष्ण दास की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाए। चिन्मय दास को चिन्मय प्रभु के नाम से भी जाना जाता है। वह 2024 से जेल में बंद हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें उचित सुनवाई के बिना लंबे समय से हिरासत में रखा गया है।
एनसीपीआई के कार्यकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
एनसीपीआई के एक कार्यकर्ता ने दावा किया कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के शासन के दौरान हिंदू संत होने के कारण चिन्मय प्रभु को जेल में रखा गया है। कार्यकर्ता के मुताबिक, दास किसी हिंसा में शामिल नहीं थे और उन्हें अपनी मां के निधन पर पैरोल मांगनी पड़ी थी। उन्होंने संत की तत्काल रिहाई की मांग की। ये आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं।
एनसीपीआई चर्चा में कैसे आई?
एनसीपीआई त्रिपुरा में पंजीकृत एक कम चर्चित संगठन था। हालांकि, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के बहुमत के इस पार्टी में विलय करने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। चिन्मय दास की रिहाई को लेकर शनिवार को हुए प्रदर्शन में भी पार्टी के कार्यकर्ता शामिल हुए।
क्यों हुई थी दास की गिरफ्तारी?
बांग्लादेश में हिंदू संत और पूर्व इस्कॉन नेता चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका हवाई अड्डे के पास गिरफ्तार किया गया था। उन पर चटगांव में एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित अपमान करने के आरोप में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। 26 नवंबर 2024 को अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया। बाद में उन पर वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या समेत कई अन्य मामले भी दर्ज हुए। सितंबर 2026 तक की रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें कुछ मामलों में जमानत मिलने के बावजूद अन्य मामलों के कारण रिहाई नहीं मिली है।