डीजल वाहनों को दिल्ली सरकार से राहत
डीजल टैक्सियों पर राजधानी दिल्ली में लगे प्रतिबंध के बाद सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि अगर दिल्ली-एनसीआर में डीजल टैक्सियों पर बैन लगता है तो देश को करोड़ो डॉलर का नुकसान हो सकता है। केंद्र सरकार ने कहा कि डीजल टैक्सियों पर लगे प्रतिबंध के बाद दिल्ली-एनसीआर में काम कर रहे बीपीओ सेक्टर पर बड़ा असर पड़ेगा।
सॉलिस्टिर जनरल रंजीथ कुमार ने कहा कि डीजल टैक्सियों पर बैन लगने के कारण बीपीओ सेक्टर देश के बाहर अपना ऑपरेशन लगा सकते हैं। डीजल टैक्सियों पर बैन उनके काम पर बड़ा असर डालेगा।
सॉलिस्टिर जनरल ने मुख्य न्यायधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि बीपीओ सेक्टर में काम करने वाले लोगों को ऑफिस तक सही समय में पहुंचाने और लाने में डीजल टैक्सी की अहम भूमिका होती है। अगर यह टैक्सियां चलना बंद हो गई तो इन बीपीओ की लागत में अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।
आपको बताते चले कि पिछले शनिवार को न्यायधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने ही दिल्ली-एनसीआर में डीजल टैक्सी के चलाने पर बैन लगाया था। डीजल कैब ऑपरेटर को 30 अप्रैल तक का समय दिया गया था कि वो अपनी टैक्सी को सीएनजी में बदल लें। जब कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर क्यों बीपीओ सीएनजी बसों को अपने प्रयोग नहीं कर रहा है? तो केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीएनजी बस छोटी और सकरी गलियों में नहीं जा सकती है। रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को उनके घर तक छोड़ना होता है। ऐसे में यह बस काम नहीं कर सकती हैं।
एन्वायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (ईपीसीए) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि डीजल टैक्सी को अगले पांच सालों में पूरी चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा सकता है। डीजल टैक्सियों पर लगे प्रतिबंध के बाद राजधानी दिल्ली-एनसीआर में 30,000 डीजल टैक्सियां चलनी बंद हो गई है।
इस मामले में अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पार्टियों को सोमवार को अपने सुझावों के साथ आने के लिए कहा है।