बाबा रामदेव ने अमर उजाला के लाइव कार्यक्रम में उन योगासनों को करके दिखाया, जिनके माध्यम से कोई भी व्यक्ति स्वयं को रोग मुक्त करके रख सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आजीवन निरोगी रहने के लिए तीन से पांच मिनट प्राणायाम, 10 मिनट कपालभाती, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ॐ का उच्चारण करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति अगर सूर्य नमस्कार आसन भी दस से पंद्रह मिनट कर ले, तो उसे पूरे दिन में स्वस्थ रहने की ऊर्जा मिल जाती है। ऐसे लोग किसी बीमारी के जाल में नहीं फंसते।
उन्होंने कहा कि यह शून्य बजट में स्वस्थ रहने का एकमात्र कारगर उपाय है।
क्या बाबा रामदेव कभी स्वदेशी जैसा कोई आन्दोलन चलाएंगे? इस सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत कष्ट होता है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश को दूसरे देशों से आयातित खाद्य तेल पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि अगर भारत को आने वाले समय में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान हासिल करना है, तो उसके लिए स्वदेशी को ही मूलमंत्र बनाना पड़ेगा। इसके लिए एक-एक कर क्षेत्र चुने जा सकते हैं और उन पर क्रम से कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इसके बारे में उनकी गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री कार्यालय और कई अन्य महत्वपूर्ण लोगों से बातचीत हुई है और आने वाले समय में वे स्वदेशी आंदोलन को एक नया रूप प्रदान करेंगे।
बाबा रामदेव ने कहा कि देश की सरकारें अपनी जनता की मां-बाप होती हैं और कोई भी मां-बाप अपने बच्चे को कभी शराब नहीं पिलाता। इसलिए सरकारों को राजस्व के मोह से दूर हटते हुए शराब जैसी चीजों पर रोक लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में राजस्व बढ़ाने के लिए शराब बेचने का वे कभी समर्थन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि भारत को व्यसनों से मुक्ति के लिए भी आंदोलन चलाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन लगाने के फैसले को वे किस प्रकार देखते हैं? इस सवाल पर योग गुरु ने कहा कि आलोचना करना बेहद आसान काम है। लेकिन अमेरिका, रूस, ग्रेट ब्रिटेन और चीन जैसे ताकतवर देशों में कोरोना के कारण लाखों लोगों की मौत हुई है।
उस सबको देखकर यह अहसास होता है कि प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन का फैसला बिलकुल सही समय पर लिया। अगर पीएम ने यह फैसला नहीं लिया होता तो शायद आज भारत में कोरोना के कारण 50 लाख लोग बीमार पड़ चुके होते और एक से दो लाख लोगों की जान जा चुकी होती।