लाखों-करोड़ों अनुयायियों को आध्यात्म की राह पर ले जाकर बाबा और गुरु की पदवी तो वह पहले ही हासिल कर चुके हैं। जब इतने सारे शिष्यों के गुरु हैं तो फिर भारत सरकार का प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवार्ड उनकी पहुंच से दूर कैसे रहे?
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख और जट्टू इंजीनियर में कॉमेडी से अपने शिष्यों को गुदगुदाने के बाद संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह ने अब इसी द्रोणाचार्य अवार्ड को लक्ष्य बना लिया है।
जी हां, खिलाड़़ियों को तराश कर देश के लिए मेडल दिलाने वाले खेल गुरुओं के लिए बने इस अवार्ड पर दावा बाबा ने ठोका है। उन्होंने खेल मंत्रालय को इस अवार्ड के लिए दावा साक्षी मलिक को रियो ओलंपिक में पदक दिलाने वाले उनके कोच कुलदीप सिंह और मंदीप समेत 35 खेल प्रशिक्षकों की दावेदारी के बीच ठोका है।
खेल मंत्रालय भी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख का इस अवार्ड के लिए आवेदन देखकर हैरान है, लेकिन उसने उनके आवेदन पर कोई छेड़खानी नहीं करते हुए इसे चयन समिति पर छोड़ दिया है।
गुरमीत राम रहीम का आवेदन मंत्रालय को अवार्ड पर दावे के लिए अंतिम तिथि 28 अप्रैल को मिला है। खास बात यह है कि उन्होंने लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए इस अवार्ड पर दावा किया है, लेकिन खेलों की कैटेगरी की जगह उन्होंने ‘मिसलेनियस’ भरा है, जबकि अवार्ड पर दावे के लिए किसी भी खेल से संबद्ध होना और उसका नाम देना अनिवार्य है।
मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह अवार्ड आध्यात्म से जुड़े गुरुओं के लिए नहीं बल्कि उच्चस्तरीय खिलाड़ियों को पैदा करने वाले खेल प्रशिक्षकों के लिए है। ऐसा पहली बार है जब आध्यात्मिक गुरु ने अवार्ड पर दावा ठोका है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि चयन समिति नियमों के अनुसार काम कर उनके आवेदन को खारिज कर देगी।