मराठी कीर्तनकार निवृत्ति महाराज इंदुरीकर ने बेटा पैदा करने की तरकीब सुझाने पर उठे विवाद पर माफी मांगते हुए मामले को खत्म करने का आग्रह किया है। उनका माफी नामा तब आया जब महाराष्ट्र सरकार ने एलान किया कि इस मामले में केस दायर नहीं होगा। सरकार में राज्य मंत्री बच्चू काडू ने कहा कि बाबा केवल अपने कीर्तन के जरिए लोगों को ज्ञान देने की कोशिश ही कर रहे थे।
अगर वह गलत हैं तो कानून अपना काम करेगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। चौतरफा आलोचना के बाद बैकफुट पर आए बाबा ने कहा कि बीते 26 सालों में कीर्तन कार्यक्रमों में उन्होंने अंधविश्वासों के खिलाफ ही काम किया है पर अगर किसी को ठेस पहुंची हो तो वे माफी मांगते हैं। बाबा ने अपने बचाव में यह भी कहा कि कुछ लोग उनके समाज के प्रति कार्य को लेकर नाराज हैं और उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं ।
क्या कहा था बाबा ने
कीर्तन करने वाले निवृत्ति महाराज ने अहमदनगर जिले में कथित तौर पर कहा था कि सम संख्या वाले दिन संसर्ग से पुत्र उत्पन्न होता है और विषम संख्या वाले दिन से पुत्री। उनका यह बयान सामने आने के बाद एक स्वैच्छिक संगठन, महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने आरोप लगाया था कि उनका बयान लिंग निर्धारण संबंधी कानून पीसीपीएनडीटी का उल्लंघन करता है। समिति समाज में फैले अंधविश्वासोें को दूर करने की दिशा में काम करती है।